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शिव का दान और माता पार्वती का श्राप: पढ़ें रावण को कैसे मिली थी सोने की लंका?

Published: Sat, 11 Jul 2026 12:15 PM (IST)

रावण को सोने की लंका भगवान शिव से भिक्षा में मिली थी, जिसे विश्वकर्मा ने माता पार्वती के आग्रह पर ...और पढ़ें

किसने दी रावण को सोने की लंका? (Picture Credits- AI Image)

किसने दी रावण को सोने की लंका? (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण काल में लंकापति रावण का सोने की लंका का महल बेहद भव्य सुंदर था। रावण को अपार धन-संपत्ति और शक्ति होने का अधिक अहंकार था, जिसकी वजह से उसका अंत हुआ और उसकी सोने की लंका जलकर राख हो गई। क्या आप जानते हैं कि लंकापति रावण की सोने की लंका कैसे बनी और उसको इतना सुंदर महल कैसे प्राप्त हुआ। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस लेख में आपको विस्तार से बताते हैं कि रामायण इस खास प्रसंग के बारे में।

रावण को कैसे मिली सोने की लंका?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार का समय था जब कैलाश पर्वत पर मां पार्वती से मिलने के लिए माता लक्ष्मी पहुंचीं, तो उन्होंने मां पार्वती से कहा कि आप एक राजकुमारी हैं और कैलाश पर्वत पर कैसे अपना जीवन यापन कर लेती हैं। इसके बाद मां पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि अन्य सभी देवी-देवताओं के पास अपने-अपने सुंदर महल हैं। इसलिए हमे भी एक महल में रहना चाहिए। पहले भगवान शिव ने मां पार्वती की बात को मानने से इंकार कर दिया, लेकिन जब मां पार्वती महल की बात को लेकर जिद करने लगीं, तो भगवान शिव मान गए।

ravan ki lanka

(Picture Credits- AI Image)

महल बनान की विश्वकर्मा जी को दी

इसके बाद महादेव ने भगवान विश्वकर्मा जी को सोने का महल बनाने की जिम्मेदारी दी। महादेव के वचन के अनुसार विश्वकर्मा जी ने एक बेहद सुंदर सोने की लंका बनाई। जब एक बार रावण सोने की लंका के ऊपर से जा रहा था, तो महल को देख उसे प्राप्त करने का लालच आया गया। इसके बाद उसने एक ब्राह्मण का रूप धारण किया और भगवान शिव के पास पहुंचा। ब्राह्मण ने भगवान शिव से भिक्षा के रूप में सोने की लंका मांग की। भगवान शिव को ब्राह्मण के असली रूप के बारे में पता था। इसके बाद महादेव ने लंकापति रावण को सोने की लंका को भिक्षा क रूप में दे दिया।

मां पार्वती को आया क्रोध

इसके बाद जब रावण के द्वारा किए गए छल की जानकारी मां पार्वती को हुई, तो उनको अधिक क्रोध आया। मां पार्वती ने क्रोध में आकर रावण को श्राप दिया कि एक दिन सोने की पूरी लंका आग में जलकर खाक हो जाएगी। इसी श्राप के प्रभाव की वजह से हनुमान जी ने अपनी पूंछ के सोने की लंका में आग लगा। रावण को सोने की लंका मिलने का वर्णन वाल्मीकि रामायण उत्तर काण्ड में मिलता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।