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घर में रखे लड्डू गोपाल के पुराने वस्त्रों को भूलकर भी कचरे में न फेंकें, इस विधि से करें विसर्जन

Published: Thu, 17 Sep 2026 01:47 PM (IST)

लड्डू गोपाल के पुराने वस्त्रों को कचरे में फेंकने से बचें और उन्हें सम्मानपूर्वक विसर्जित करें। इसके लिए सही विधि क्‍या है, चलिए जानते हैं।

लड्डू गोपाल के पुराने वस्त्रों का सम्मानपूर्वक विसर्जन । (Picture Credit- AI Generated)

लड्डू गोपाल के पुराने वस्त्रों का सम्मानपूर्वक विसर्जन । (Picture Credit- AI Generated)

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जिन घरों में लड्डू गोपाल की सेवा की जाती है, वे लोग लड्डू गोपाल से जुड़ी सभी चीजें रखते हैं। इन चीजों में उनके वस्त्रों से लेकर ज्वेलरी और श्रृंगार का अन्य सामान तक सभी कुछ शामिल होता है। हालांकि, इन सभी चीजों का इस्तेमाल एक से दो बार करने के बाद इन्हें विसर्जित करना होता है। खासतौर पर लड्डू गोपाल के कपड़ों को लेकर हर भक्त दुविधा में होता है कि आखिर पुराने वस्त्रों का क्या किया जाए।

इसलिए हमने इस विषय पर एस्ट्रोपत्रि के ज्योतिष चंद्रेश शर्मा जी से बात की और जाना कि भगवान के वस्त्रों को कैसे विसर्जित करना चाहिए। वह कहते हैं, "जो कपड़े उपयोग में न हों उन्हें कचरे में न फेंका जाए। भगवान के वस्त्रों को पूरी श्रद्धा और स्वच्छता के साथ विसर्जन होना चाहिए।" चलिए इससे जुड़ी जरूरी जानकारी के बारे में जानते हैं।

पुराने वस्त्रों को कचरे में क्यों न डालें?

धार्मिक आस्था के अनुसार, भगवान को अर्पित की गई कोई भी वस्तु किसी सामान्य कचरे के साथ फेंकना उचित नहीं होता है। खासकर जिन वस्त्रों का उपयोग नियमित पूजा में हुआ हो, उन्हें सम्मानपूर्वक हटाने की परंपरा है।

बहते जल में प्रवाहित करने की परंपरा

धार्मिक परंपराओं में लड्डू गोपाल के पुराने पूजा वाले वस्त्रों को बहते जल में प्रवाहित करने की बात कही जाती है। यदि कोई व्यक्ति इस विधि को अपनाता है, तो स्वच्छ और धार्मिक रूप से उपयुक्त स्थान का ही चुनाव करें। जिन घाटों पर पवित्र नदी बहती हो, वहीं पर इन वस्त्रों का विसर्जन करें।

मिट्टी में दबाने का विकल्प

यदि बहता हुआ जल उपलब्ध नहीं है, तो पुराने वस्त्रों को साफ मिट्टी में गाड़ा भी जा सकता है। इसके लिए घर के गमले या बगीचे में अलग स्थान चुना जा सकता है। वस्त्र प्राकृतिक कपड़े के हों तो उन्हें मिट्टी में रखने का विकल्प ज्यादा अच्छा है क्योंकि समय के साथ वे कपड़े खाद में बदल जाते हैं।

भस्म बनाने की विधि

आप भगवान के सूती या रेशमी वस्त्रों को सुरक्षित स्थान पर अग्नि को समर्पित कर उनकी भस्म बना लें और फिर उन्‍हें पौधों की मिट्टी में मिला दें।

विसर्जन से पहले क्षमा प्रार्थना

पुराने वस्त्र अलग करते समय लड्डू गोपाल के सामने दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। भक्त भगवान से प्रार्थना के दौरान इस बात के लिए माफी भी मांग सकते हैं कि पूजा में जाने-अनजाने हुई किसी भी भूल को क्षमा करें। इसके बाद पुराने वस्त्रों को सम्मानपूर्वक अलग कर दें और भगवान को नए वस्त्र अर्पित करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है