Krishna Story: उफनती यमुना ने वासुदेव को क्यों दिया था रास्ता? पढ़ें कैसे हुआ श्रीकृष्ण का जन्म
जानिए जब वासुदेव कान्हा जी को गोकुल ले जा रहे थे, तब उफनती यमुना ने रास्ता क्यों दिया। पढ़ें इस ...और पढ़ें

जानें कैसे हुआ कान्हा का जन्म? (AI-Generated Image)
HighLights
उफनती यमुना अशांत मन और सांसारिक उथल-पुथल का प्रतीक है
ईश्वर की शरण लेने से जीवन की बड़ी चुनौतियां आसान होती हैं
अहंकार मिटने पर बाधाएं शांत होती हैं और आसान रास्ता मिलता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब भी हम भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की बात करते हैं, तो हमारे मन में सबसे पहली तस्वीर वासुदेव जी की उभर कर आती है। वो दृश्य जिसमें भयंकर बारिश और अंधेरी रात के बीच नन्हें बाल कृष्ण को एक टोकरी में सिर पर रखकर मथुरा से गोकुल की ओर ले जा रहे थे। उनके सामने उफनती विशाल यमुना नदी थी, लेकिन उसने भी भगवान के चरण स्पर्श करते ही उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दे दिया था।
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी श्री चंद्रेश शर्मा के अनुसार, यह घटना केवल एक साधारण कहानी नहीं है। इस पौराणिक कथा में हमारे जीवन के लिए एक बहुत ही गहरा और महत्वपूर्ण आध्यात्मिक संदेश छिपा हुआ है। आइए इस आर्टिकल में हम इसी के बारे में जानते हैं।
कथा का आध्यात्मिक और सांकेतिक संदेश
अशांत मन और संसार का प्रतीक: इस प्रसंग में उफनती हुई यमुना नदी वास्तव में हमारे अशांत मन, हमारी तेज इच्छाओं (तीव्र वासनाओं) और इस दुनिया की भागदौड़ व उथल-पुथल का प्रतीक है। हमारे जीवन में भी कई बार परेशानियां इसी तरह उफान पर होती हैं, जो हमें डराती हैं।
ईश्वर की शरण लेना: जब कोई इंसान अपने 'जीवन रूपी टोकरी' में भगवान (यानी सच्चा ज्ञान और भक्ति) को धारण कर लेता है और दुनिया की मुश्किलों से पार पाने की कोशिश करता है, तो शुरुआत में उसे चुनौतियां बहुत बड़ी और विकराल लगती हैं। ठीक वैसे ही जैसे वासुदेव जी को शुरुआत में यमुना नदी का उफान डरावना लगा था।
अहंकार का शमन और शांति: चमत्कार तब होता है जब व्यक्ति का घमंड या अहंकार पूरी तरह से मिट जाता है। जैसे ही हमारा निर्मल मन ईश्वर के श्री चरणों का स्पर्श करता है, संसार की सारी कठिनाइयां और बाधाएं अपने आप शांत हो जाती हैं। इसके बाद इंसान को जीवन में आगे बढ़ने का एक सहज और सही मार्ग मिल जाता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
