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Karwa Chauth को क्यों कहा गया है बड़ी चौथ, पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए क्यों रखा जाता है यह व्रत?

Published: Sat, 24 Oct 2026 04:30 PM (IST)

करवा चौथ को सबसे बड़ी चौथ क्यों कहा जाता है? जानिए रोहिणी नक्षत्र से इसका संबंध, चंद्रदेव की कथा, पति ...और पढ़ें

करवा चौथ 2026: इस वर्ष बन रहा है बड़ा संयोग। (Picture Credit- AI Generated)

करवा चौथ 2026: इस वर्ष बन रहा है बड़ा संयोग। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण चौथ माना गया है, जिसे हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। सालभर में कुल 24 चौथें आती हैं, लेकिन करवा चौथ का विशेष महत्व है। इसी दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण बढ़ता है। इस विषय पर हमारी उज्जैन के पंडित एवं ज्योतिषाचार्य मनीष शर्मा से बात हुई। वह कहते हैं, " वर्ष में 24 चौथ पड़ती हैं और हर बार ये अलग-अलग नक्षत्रों में पड़ती हैं। करवा चौथ को सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण चौथ इसलिए माना गया है क्योंकि यह चौथ रोहिणी नक्षत्र में पड़ती है और रोहिणी चंद्र देव की सबसे प्रिय रानी हैं।"

इतना ही नहीं, पंडित जी यह भी बताते हैं कि इस बार की करवा चौथ और भी खास है क्योंकि इस बार शुक्र- बुध की युति से लक्ष्‍मीनारायण राजयोग और सूर्य की स्थिति से बुधादित्‍य योग बनेगा, जो रिश्‍तों को गहराई से मजबूत बनाएगा और रिश्‍तों में प्रेम भावना को बढ़ाएगा। चलिए जानते हैं कि आखिर इस पर्व का क्या महत्व है और कैसे इस वर्ष यह और भी ज्यादा खास है।

करवा चौथ के दिन क्‍यों रखा जाता है पति की लंबी उम्र के लिए व्रत?

पंडित मनीष शर्मा के अनुसार, करवा चौथ पर पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखे जाने वाले व्रत का संबंध चंद्रदेव और उनकी पत्नी रोहिणी की पौराणिक कथा से है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा दक्ष की 27 नक्षत्र रूपी पुत्रियों का विवाह चंद्रदेव से हुआ था। इनमें चंद्रमा रोहिणी से सबसे अधिक प्रेम करते थे और अपना ज्यादातर समय उन्हीं के साथ बिताते थे। इससे नाराज होकर अन्य पत्नियों ने राजा दक्ष से शिकायत की। इस पर दक्ष ने चंद्रदेव को क्षय होने का श्राप दे दिया। बाद में भगवान शिव की कृपा से चंद्रमा को राहत मिली और उन्हें दोबारा उनकी कलाएं मिलीं।

हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बनता है। धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा को प्रेम, शांति और सुख का प्रतीक माना गया है।

इसी आस्था के चलते महिलाएं करवा चौथ पर चंद्रदेव की पूजा कर अपने पति की दीर्घायु, वैवाहिक जीवन में प्रेम और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। यह व्रत पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक होता है।

करवा चौथ के दिन लक्ष्‍मीनारायण योग बनने से लाभ

लक्ष्मीनारायण योग तब बनता है जब ग्रहों के राजकुमार बुध और धन-वैभव के स्वामी शुक्र एक ही राशि में बैठे होते हैं। इस वर्ष करवा चौथ के दिन यह योग बन रहा है। इस योग के बनने से गृहस्थ जीवन में धन, सुख-सुविधा, करियर में प्रमोशन और रिश्तों के मध्य आकर्षण बनने की संभावना बढ़ जाएगी।

सूर्य और बुध की युति से करवाचौथ पर लाभ

बुधादित्‍य योग का निर्माण तब होता है, जब कुंडली में एक ही राशि में बुध और सूर्य साथ बैठे होते हैं। इस बार करवा चौथ के दिन सूर्य और बुध की युति बन रही है, जिससे इस दिन किए गए व्रत, पूजन का महत्‍व कई गुना बढ़ जाएगा और महिलाओं को अखंड सौभाग्‍य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।