विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

करवा चौथ की पूजा में चावल के फरे क्यों हैं जरूरी? सिर्फ भोग नहीं, जुड़ा है अखंड सौभाग्य का बड़ा रहस्य

Published: Thu, 22 Oct 2026 08:00 PM (IST)

करवा चौथ पूजा में चावल के फरे चढ़ाने का महत्व अखंड सौभाग्य और समृद्धि से जुड़ा है। यह भोग शुद्धता, ...और पढ़ें

करवा चौथ पूजा में चावल के फरे का महत्व (Picture Credit: AI Generated)

करवा चौथ पूजा में चावल के फरे का महत्व (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. अखंड सौभाग्य और कुल की समृद्धि का प्रतीक।

  2. भाप में पके सात्विक भोजन का भोग लगाने का नियम।

  3. नई फसल के स्वागत के रूप में प्रथम अर्पण।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।

वहीं इस दिन को लेकर कई अन्य परंपराएं भी बनाई गई हैं जो सदियों से चली आ रही हैं। इन्हीं में से एक है चंद्रमा और करवा माता को चावल के फरे चढ़ाना। क्या चावल के फरे सिर्फ भोग का हिस्सा हैं या इनके पीछे अखंड सौभाग्य से जुड़ी कोई धार्मिक मान्यता भी छिपी है? आइए एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा से जानें मुख्य रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश यानी पूर्वांचल और बिहार के कुछ हिस्सों में करवा चौथ के व्रत में चावल के फरे चढ़ाने की परंपरा का महत्व क्या है?

अखंड सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक

चावल को धार्मिक दृष्टिकोण से शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। फरा बनाने में चावल के आटे का उपयोग किया जाता है जिसे अखंड सौभाग्य और कुल की समृद्धि का प्रतीक माना गया है। चावल को हमेशा ऐसी सामग्री के रूप में देखा जाता है जो समृद्धि को बढ़ाती है।

किसी भी पूजा-पाठ में चावल का इस्तेमाल जरूरी माना जाता है। इसी वजह से जब चावल के आटे के फरे प्रसाद के रूप में चंद्रमा को चढ़ाए जाते हैं, तो यह व्रत की पूर्णता को दिखाता है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद होता है।

सात्विक भोग का नियम

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, करवा चौथ के व्रत में बिना तेल-मसाले या केवल भाप में पके सात्विक भोजन का भोग लगाने का नियम सदियों से चला आ रहा है। फरा पूरी तरह भाप में पकने के कारण अत्यंत शुद्ध और सात्विक भोजन माना जाता है। जब आप इस व्यंजन को चंद्रमा को चढ़ाते हैं, तो यह घर की समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करता है।

नई फसल का प्रथम अर्पण

मुख्य रूप से पूर्वांचल में करवा चौथ के समय यानी कार्तिक मास धान की नई फसल आने का समय होता है। ऐसे में नई फसल के स्वागत के रूप में करवा चौथ में नए चावल के आटे के फरे बनाकर चंद्रमा को चढ़ाए जाते हैं।

अनाज से तैयार भोग सबसे पहले ईश्वर और करवा माता को समर्पित किया जाता है और उनसे घर की खुशहाली का आशीर्वाद लिया जाता है।

इन्हीं कारणों से करवा चौथ के दिन चावल के फरे बनाए जाते हैं और उसका भोग ग्रहण किया जाता है।

यह भी पढ़ें- करवा चौथ 2026: पंजाब, यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश में कैसे मनाया जाता है यह पर्व?

यह भी पढ़ें- 17 दिन के लिए शुक्र अस्त होने से नवविवाहितों में कन्फ्यूजन! क्या पहली बार करवा चौथ का व्रत रखना होगा अशुभ?

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।