विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

करवा चौथ 2026: पंजाब, यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश में कैसे मनाया जाता है यह पर्व?

Published: Wed, 21 Oct 2026 10:19 AM (IST)

करवा चौथ हिंदू विवाहित महिलाओं के लिए पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत है, जो ...और पढ़ें

भारतवर्ष में करवा चौथ उत्सव

भारतवर्ष में करवा चौथ उत्सव

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म से जुड़ी विवाहित महिलाओं के लिए करवा चौथ का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्तूबर 2026, गुरुवार के दिन रखा जाएगा। यह एक दिन का पर्व पति-पत्नी के गहरे प्यार और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती है और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।

करवा चौथ का पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे कई राज्यों में बेहद ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं अलग-अलग राज्यों में किस तरह करवा चौथ का व्रत रखा जाता है?

पंजाब में करवा चौथ

पंजाब में करवा चौथ का पर्व बेहद ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। विवाहित महिलाएं सूरज निकलने से पहले उठती हैं और पारंपरिक उत्सव के कपड़े पहनकर खुद को सजाती हैं। शाम होने पर विवाहिता की मां अपनी बेटी के लिए बायना भेजती है, जिसमें नए कपड़े, नारियल, मिठाइयां, फल और सिंदूर जैसी पवित्र वस्तुएं शामिल होती हैं।

जब चंद्रमा निकलने का समय आता है, तो विवाहित महिलाएं चलनी और पूजा की थाली लेकर छत पर आती हैं और थाली में गेहूं के आटे से बने दीपक, मिठाइयां और पानी से भरा गिलास लाती हैं। वे चांद के निहारने के साथ उसे कच्ची लस्सी अर्पण करती हैं। इसके बाद पति अपनी पत्नी को वही कच्ची लस्सी और मिठाइयां खिलाते हैं। पंजाब में करवा चौथ की रात का भोजन पारंपरिक स्वाद और प्रेम से भरपूर माना जाता है। इसमें पौष्टिक दालें, जैसे राजमा और हरी मूंग शामिल होती है, जिन्हें पूड़ी और चावल के साथ खाया जाता है।

उत्तर प्रदेश और बिहार में करवा चौथ

उत्तर प्रदेश और बिहार में भी करवा चौथ की शुरुआत भोर में होती है, जब सुहागिन महिलाएं सर्गी खाती हैं। यहां की सर्गी में खीर, सेवईंया, अलग-अलग तरह की मिठाइयां, नमकीन, नारियल, सूखे मेवे और कई तरह के पकवान शामिल होते हैं। संध्याकाल में विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार कर खुद को सुंदर तरीके से सजाती हैं।

बिछुए, पायल, कांच की चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी और आलता भी लगाती हैं। इस पावन मौके पर महिलाएं अपने हाथों को मेहंदी से सजाती हैं, जिसे सौभाग्य और प्यार का प्रतीक माना जाता है।

शाम होने के बाद ही करवा चौथ की रस्में चांद निकलने से ठीक पहले शुरू हो जाती हैं। सुहागिन महिलाएं पारंपरिक परिधान से सज-धजकर तैयारी रहती हैं। वे अपने पड़ोसी और रिश्तेदारों के साथ मिलकर पूजा में हिस्सा लेती हैं और सच्चे मन से अपने पति की लंबी उम्र के लिए आशीर्वाद मांगती हैं।

चंद्रमा निकलना इस त्योहार का सबसे प्रतीक्षित पल होता है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में करवा चौथ के मौके पर चावल के आटे से जमीन पर चंद्रमा की आकृति बनाई जाती है। इसके बाद वे अपने करवे को सात बार जल में अर्पण करती हैं और खास मंत्रों व प्रार्थनाओं का जाप करती हैं।

राजस्थान

राजस्थान अपनी समृद्धि और गौरवशाली विरासत के लिए जाना जाता है। यहां पर भी करवा चौथ मनाया जाता है, लेकिन देश के बाकी हिस्सों से थोड़ा हटकर अपने अंदाज में सुहागिन महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी परिधान पहनती हैं और पूरे दिन पूजा-पाठ और सेवा के कार्यों में हिस्सा लेती हैं। यहां पर भी महिलाएं चांद दिखाई देने के बाद ही व्रत तोड़ती हैं।

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में भी करवा चौथा का उत्सव काफी प्रसिद्ध है, खासकर भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में। यहां भी महिलाएं सूर्योदय होने से लेकर चंद्रमा दिखाई देने तक निर्जला उपवास रखती हैं। चांद दिखाई देने पर पति की लंबी आयु की कामना करने के बाद ही व्रत तोड़ती हैं।

महाराष्ट्र और गुजरात

करवा चौथ वैसे तो महाराष्ट्र और गुजरात का त्योहार नहीं है, लेकिन समय के साथ यह उत्सव महाराष्ट्र और गुजरात जैसे महानगरों में काफी प्रसिद्ध हो चुका है। ऐसे में गुजरात और महाराष्ट्र में भी करवा चौथ के मौकै पर उत्साह और उमंग देखने को मिलती है।

हाल के वर्षों में यह उत्सव न सिर्फ उत्तर भारत में प्रसिद्ध हुआ है, बल्कि दक्षिण भारत के कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों में भी यह त्योहार उत्तर भारतीय परिवारों और स्थानीय समुदायों द्वारा बेहद ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।

वर्तमान समय के हिसाब से करवा चौथ भारत वर्ष में मनाया जाता है, हालांकि सभी जगहों पर स्थानीय रीति-रिवाज, खान-पान और पहनावे के अंतर को छोड़कर बाकी सब कुछ एक जैसा ही है।

यह भी पढ़ें- 17 दिन के लिए शुक्र अस्त होने से नवविवाहितों में कन्फ्यूजन! क्या पहली बार करवा चौथ का व्रत रखना होगा अशुभ?

यह भी पढ़ें- आखिर क्यों करवा चौथ और हरितालिका तीज से भी ज्यादा कठिन है जितिया व्रत, क्या है इसके पीछे की वजह?

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।