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करवा चौथ 2026: स्टील या प्लास्टिक का करवा तो नहीं खरीद रहीं? कहीं अनजाने में निष्फल न हो जाए आपका व्रत!

Published: Mon, 26 Oct 2026 09:01 AM (IST)

इस साल 29 अक्टूबर को करवा चौथ (Karwa Chauth 2026) का व्रत रखा जाएगा। ऐसे में महिलाओं को करवा खरीदता ...और पढ़ें

करवा चौथ पर मिट्टी का करवा क्यों जरूरी है?

करवा चौथ पर मिट्टी का करवा क्यों जरूरी है?

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म को मानने वाली सुहागिन महिलाएं इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार के दिन रखने जा रही हैं। शादीशुदा महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु और खुशहाल जीवन के लिए निर्जला उपवास रखती हैं।

संध्या की शुभ बेला में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश के साथ-साथ चंद्रमा देवता की भी पूजा की जाती है। रात में जब चंद्रमा अपनी पूरी ललिमा के साथ आसमान में दिखाई देता है, तब सुहागिन महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।

करवा चौथ (Karwa Chauth 2026) की पूजा में करवा का खास महत्व होता है। आमतौर पर इस दिन के लिए महिलाएं मिट्टी से बने करवे का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन तेजी से बदलते दौर में कई महिलाएं हर साल मिट्टी के करवे खरीदने के बजाय स्टील से बने करवे खरीदती हैं। आइए जानते हैं धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में करवा चौथ के दिन धातु से बने बर्तनों का इस्तेमाल सही या गलत?

करवा चौथ पर मिट्टी से बने करवे क्यों जरूरी?

हिंदू धर्म के कई प्रमुख त्योहारों में करवा चौथ (Karwa Chauth 2026) का भी खास महत्व है। मान्यताओं के मुताबिक, इसे करवा माता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं मिट्टी के करवे में पानी भरकर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। चांद को देखने और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है। इसलिए करवा चौथ की पूजा में खासतौर पर करवा का इस्तेमाल किया जाता है।

करवा बदलने की परंपरा क्या है?

करवा चौथ के मौके पर कुछ जगहों पर करवा बदलने की परंपरा निभाई जाती है। इसमें पूजा के दौरान 2 करवे रखे जाते हैं। इनमें से एक करवा खुद के लिए और दूसरा करवा फेरने के लिए रखा जाता है। पूजा खत्म होने के बाद महिलाएं आपस में करवा बदलती हैं।

इसके बाद सास या परिवार में मौजूद अन्य महिलाओं को भेंट करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। माना जाता है कि इस परंपरा को निभाने से अखंड सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है।

करवा चौथ पर मिट्टी का करवा क्यों?

धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, करवा चौथ के मौके पर सुहागिन महिलाओं को मिट्टी से बना करवा इसलिए लेना चाहिए क्योंकि इसमें मिट्टी और जल दोनों के तत्व गुण होते हैं।

मिट्टी का करवा धरती मां से जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है,जबकि इसमें रखा पानी जीवन और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। करवा चौथ पर मिट्टी का करवा इस्तेमाल करना धार्मिक नजरिए से शुभ और उचित माना जाता है।

क्या स्टील, लोहा या प्लास्टिक का करवा सही?

ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, अलग-अलग धातुओं से बनी वस्तुओं का संबंध अलग-अलग ग्रहों से जुड़ा होता है। लोहा और कुछ खास धातुओं को शनिदेव से जोड़कर देखा जाता है, जबकि प्लास्टिक को राहु-केतु जैसे अशुभ ग्रहों से जोड़कर देखा जाता है।

ऐसे में माना जाता है कि, सुहागिनों को करवा चौथ व्रत के दौरान इन सामग्रियों से बनी वस्तुओं को खरीदने से बचना चाहिए। करवा चौथ की पूजा में हमेशा मिट्टी से बने करवे का ही इस्तेमाल करें। ऐसा करने से दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि और प्रेम की भावना बनी रहती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।