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जनेऊ पहनने के क्या हैं सही नियम? पढ़ें इसके 3 धागों का रहस्य और धार्मिक महत्व

Published: Wed, 16 Sep 2026 09:08 AM (IST)

हिंदू धर्म में जनेऊ का विशेष महत्व है। जनेऊ धारण करने के नियम, इसके तीन धागों का अर्थ और उपनयन संस्कार से जुड़ी पूरी जानकारी यहां पढ़ें।

जनेऊ पहनने के नियम (AI-Generated Image)

जनेऊ पहनने के नियम (AI-Generated Image)

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जनेऊ (जिसे यज्ञोपवीत भी कहते हैं) सिर्फ एक सूत का धागा नहीं है, बल्कि यह पवित्रता और आध्यात्म का बहुत बड़ा प्रतीक है। इसे उपनयन संस्कार के दौरान धारण कराया जाता है। मान्यता है कि इसे पहनने के बाद ही किसी व्यक्ति को वेदों का अध्ययन करने और पूजा-पाठ या यज्ञ जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने का अधिकार मिलता है।

3 धागों का क्या है रहस्य?

जनेऊ में मुख्य रूप से तीन धागे होते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, ये तीन धागे इंसान के तीन बड़े ऋणों को दर्शाते हैं:

  • देव ऋण
  • ऋषि ऋण
  • पितृ ऋण

जनेऊ को पहनकर व्यक्ति इन कर्जों को चुकाने का संकल्प लेता है। इन तीन धागों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का भी प्रतीक माना जाता है। पारस्कर गृह्यसूत्र से लिया गया एक श्लोक है जिसे जनेऊ पहनते समय पढ़ा जाता है:

यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥

अर्थ- यज्ञोपवीत (जनेऊ) बहुत पवित्र है। इसे दुनिया की शुरुआत के दौरान ही प्रजापति (ब्रह्मा जी) ने प्रकट/उत्पन्न किया था। यह उम्र को बढ़ाने वाला माना गया है। इस उज्ज्वल और निर्मल जनेऊ को मैं धारण करता हूं। यह जनेऊ मुझे बल (शारीरिक और मानसिक शक्ति) और तेज प्रदान करे।

क्या है उपनयन संस्कार?

हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में उपनयन संस्कार बहुत खास माना गया है। इसमें बच्चे को पहली बार पूरे विधि-विधान से जनेऊ पहनाया जाता है। यही नहीं, इसे दूसरे जन्म की तरह माना गया है। इसके बाद ही बच्चा गुरु के पास जाकर शिक्षा लेने के योग्य बनता है।

जनेऊ धारण करने के नियम

  • जनेऊ को हमेशा बाएं कंधे के ऊपर से दाईं ओर की कमर तक ही पहना जाता है। शुभ कार्यों में इसे ऐसे ही रखा जाता है।
  • शौच या किसी अशुद्ध कार्य के दौरान इसे दाहिने कान पर लपेटने का नियम है, ताकि इसकी पवित्रता भंग न हो।
  • अगर जनेऊ गलती से टूट जाए या ज्यादा मैला हो जाए, तो इसे तुरंत बदल लेना चाहिए। खंडित जनेऊ पहनना अशुभ माना जाता है।

इसे बदलने का सही समय

वैसे तो श्रावणी पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के दिन पुराना जनेऊ उतारकर नया जनेऊ पहनने की परंपरा बहुत प्रसिद्ध है। मान्यता है कि ऐसा करने से हमारे पूर्व संकल्प फिर से ताजा हो जाते हैं। 

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।