जनेऊ धारण करने के बाद इन नियमों को तोड़ा, तो जीवन में भुगतना पड़ेगा भारी नुकसान, पढ़ें इससे जुड़ी जरूरी बातें
हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक जनेऊ संस्कार अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो व्यक्ति को धर्म और ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

किस दिन पहनें जनेऊ (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के 16 संस्कारों को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, जिनमें उपनयन संस्कार खास है, जिसे जनेऊ संस्कार या यज्ञोपवीत कहा जाता है। यह हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में से दसवां संस्कार है।
यह संस्कार व्यक्ति को धर्म और ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस संस्कार के दौरान व्यक्ति को जनेऊ धारण करवाया जाता है, जिसके बाद व्यक्ति को जीवन में कड़े नियम का पालन करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि नियम का पालन न करने से शुभ फल की प्राप्ति नहीं होती।
शास्त्रों के अनुसार, जनेऊ के नियम शारीरिक और मानसिक पवित्रता से जुड़े होते हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं कि जनेऊ धारण करने कौन से नियम हैं।

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किस दिन पहनें जनेऊ?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जनेऊ को धारण करने के लिए बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार का दिन शुभ माना जाता है।
नया जनेऊ धारण करने की सरल विधि
सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें। इसके बाद गायत्री मंत्र का जप करते हुए जनेऊ धारण करें। जब एक बार जनेऊ धारण कर लिया, तो उसे उतारने से पहले नया जनेऊ धारण कर लेना चाहिए।
जनेऊ पहनने की दिशा
जनेऊ को बाएं कंधे के ऊपर और दाईं भुजा के नीचे से पहनें।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
जनेऊ को धारण करने के बाद नियम का पालन जरूर करना चाहिए। इससे जुड़े नियम नीचे दिए गए हैं।
- अगर आपने जनेऊ धारण किया है, तो मल-मूत्र त्याग करते समय उसे हमेशा दाहिने कान पर दो बार लपेट लेना चाहिए आपकी जानकारी के लिए ऐसा इसलिए किया जाता है, क्योंकि जनेऊ ऊपर की तरफ रहे, जिससे जनेऊ अशुद्ध होने से बचा रहे। शौच करने के बाद साफ जल से हाथ-पैर धोकर ओर कुल्ला करें। इसके बाद कान पर से जनेऊ को उतार लें।
- अगर आपका जनेऊ कहीं से टूट गया गया है, तो टुटा हुआ जनेऊ धारण करना शुभ नहीं माना जाता। इसे तुरंत उतारकर नया जनेऊ पहनें। इसके बाद पुराने जनेऊ को इधर-उधर भूलकर भी नहीं फेंकना चाहिए। खंडित जनेऊ को किस पवित्र नदी में बहते हुए जल में विसर्जित करें।
- मृत्यु होने पर या फिर में किसी के जन्म होने पर सूतक काल लग जाता है। इसके बाद सूतक काल के खत्म होने के बाद जनेऊ को बदल लेना चाहिए।
- रोजाना स्नान के दौरान जनेऊ को साफ करना चाहिए। बिना स्नान करे भोजन नहीं करना चाहिए।
- जनेऊ धारण करने वाले व्यक्ति को तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
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