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गोवर्धन पूजा पर गाय के गोबर से गिरिराज पर्वत बनाने की परंपरा क्यों है? प्रथा के पीछे छुपे रहस्य को समझें

Published: Sun, 08 Nov 2026 05:00 PM (IST)

गोवर्धन पूजा पर गाय के गोबर से गिरिराज पर्वत बनाने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह प्रथा भगवान कृष्ण के ...और पढ़ें

गोवर्धन पूजा पर गाय के गोबर से गिरिराज पर्वत क्यों बनाते हैं (Picture Credit: AI Generated)

गोवर्धन पूजा पर गाय के गोबर से गिरिराज पर्वत क्यों बनाते हैं (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. गोवर्धन पूजा दीवाली के अगले दिन मनाई जाती है।

  2. गाय के गोबर से गिरिराज पर्वत की आकृति बनती है।

  3. यह कृष्ण के गाय प्रेम और शुद्धता का प्रतीक है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गोवर्धन पूजा मुख्य रूप से दीवाली के अगले दिन मनाई जाती है और इस दिन घर में गाय के गोबर से गिरिराज पर्वत की आकृति बनाई जाती है और उसकी पूजा की जाती है। हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को यह पर्व मनाया जाता है और इस दिन श्री कृष्ण को 56 भोग चढ़ाने से उनकी कृपा मिलती है।

इस पर्व को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व को श्री कृष्ण के प्रति भक्ति प्रकट करने का एक अवसर भी समझा जाता है। गायों की पूजा के साथ गाय के गोबर से कृष्ण जी की आकृति बनाना भी इस दिन की खासियत मानी जाती है।

अक्सर मन में यह सवाल आता है कि आखिर क्यों गाय के गोबर से ही पर्वत और कृष्ण जी की आकृति बनाई जाती है? इस साल गोवर्धन पूजा का पर्व 10, नवंबर को मनाया जाएगा। आइए आपको बताते हैं इस दिन गाय के गोबर से पर्वत बनाने के महत्व के बारे में।

गाय के गोबर से क्यों बनाया जाता है गोवर्धन पर्वत?

गोवर्धन के दिन लोग अपने घर में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाते हैं और यह परंपरा सदियों पुरानी है। महिलाएं गोबर से बने इस पर्वत की विधि-विधान के साथ पूजा करती हैं और उसे 56 तरह के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। गाय के गोबर से ही इस दिन पर्वत बनाया जाता है, क्योंकि मान्यता है कि श्री कृष्ण गायों से अत्यंत प्रेम करते थे।

यही नहीं गाय के गोबर के उपलों का इस्तेमाल भी भोजन तैयार करने के लिए किया जाता था। यही नहीं पूरे घर को गाय के जाता था जिससे किसी भी तरह की अशुद्धि दूर होती थी। आज के समय में भी गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाना घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और कृष्ण जी का आशीर्वाद पाने का एक माध्यम है।

गाय के गोबर से कैसे बनाया जाता है गोवर्धन पर्वत?

गोवर्धन पूजा के दिन महिलाएं गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की एक बड़ी आकृति बनाती हैं और उसके साथ ही अन्य आकृतियां भी बनती हैं जैसे श्री कृष्ण का चित्र, गाय और बछड़े की आकृतियां। उसके बाद इन सभी चित्रों पर सिंदूर का टीका लगाया जाता है। गोवर्धन पर्वत पर ताजे फूल और कच्चा दूध चढ़ाया जाता है। 

पूजा के बाद गोवर्धन पर्वत का क्या किया जाता है?

गोवर्धन पूजा के दिन सुबह गोवर्धन पर्वत बनाकर उसकी पूजा करनी चाहिए और उसके पास एक दीपक प्रज्वलित करके रखना चाहिए। शाम के समय पर्वत और अन्य आकृतियों के पूरे गोबर को एक साथ इकठ्ठा करके उसका एक पर्वत बनाएं। इस पर्वत के शिखर पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और इसे घर के मुख्य द्वार पर रख दें।

इस पर्वत के सामने हाथ जोड़कर घर की खुशहाली की प्रार्थना करें। गाय के गोबर से बना गिरिराज पर्वत इस बात का संकेत देता है कि आपके घर के भीतर किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा का वास न हो सके। आप इस गोबर के पर्वत को सुखाकर हवन में इस्तेमाल कर सकते हैं और इसे पौधों में भी डाल सकते हैं।

गोवर्धन पूजा के दिन गायों की पूजा करना और गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतिमा बनाकर पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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