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आखिर क्यों ब्रजवासियों ने छोड़ दी थी इंद्र की पूजा? पढ़ें श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने का रहस्य

Published: Fri, 04 Sep 2026 11:30 AM (IST)

जन्माष्टमी (Janmashtami 2026) के अवसर पर श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का महत्व बताया गया है। इसमें ब्रजवासियों ने इंद्र की ...और पढ़ें

कैसे दूर हुआ इंद्र का अहंकार (Picture Credit- AI Generated)

कैसे दूर हुआ इंद्र का अहंकार (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. ब्रजवासी इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत पूजने लगे।

  2. इंद्र के क्रोध से मूसलाधार बारिश हुई।

  3. श्रीकृष्ण ने गोवर्धन उठाकर ब्रजवासियों को बचाया।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 04 सितंबर को जन्माष्टमी (Janmashtami 2026) का पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना करने के लिए अधिक शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवसर पर कृष्ण जी की पूजा-अर्चना करने से भक्त को जीवन में सभी सुख मिलते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण ने कई लीलाएं की हैं। इन्हीं लीलाओं में शामिल है गोवर्धन पर्वत से जुड़ी एक लीला। कृष्ण जी ने अपनी उंगली की मदद से गोवर्धन पर्वत उठाया था। इसकी कथा इंद्र से संबंधित है। आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं कृष्ण जी की इस लीला के बारे में।

गोवर्धन पर्वत उठाने का रहस्य

पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग के दौरान ब्रजवासी देवराज इंद्र की पूजा-अर्चना किया करते थे। उनका मानना था कि इंद्र वर्षा के देवता हैं। एक बार जब ब्रजवासी देवराज इंद्र की पूजा की तैयारी कर रहे थे, तो उस दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पिता से पूछा कि सभी ब्रजवासी देवराज इंद्र की पूजा क्यों करते हैं। नंद बाबा ने बताया कि इंद्र की पूजा अच्छी बारिश की कामना के लिए की जाती है।

तब भगवान श्रीकृष्ण ने सभी ब्रजवासियों से इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा। ब्रजवासियों ने प्रभु की बात को स्वीकार किया और गोवर्धन पर्वत की पूजा की शुरुआत की। इस व्यवहार से इंद्र को क्रोध आया और उन्होंने ब्रजमंडल को मूसलाधार बारिश और तूफानों से नष्ट करने का फैसला लिया।

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पूरे ब्रज में भयानक वर्षा शुरू हो गई और स्थिति खराब हो गई। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अहंकार तोड़ने के लिए एक लीला रची। उन्होंने अपने बाएं हाथ की सबसे छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सभी ब्रजवासी अपनी गायों और बछड़ों के साथ पर्वत के नीचे सुरक्षित आ गए। लगातार सात दिनों तक जोरदार बारिश होती रही,जिसकी वजह से इंद्र का घमंड टूट गया। इसी लीला की वजह से भगवान श्रीकृष्ण को 'गिरिधारी' के नाम से भी पुकारा जाता है।

भगवान श्रीकृष्ण की इस लीला का वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में मिलता है। इसी वजह से गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गोवर्धन पर्वत की साधना करने से जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं और भगवान कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।