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Janmashtami 2026: लड्डू गोपाल के साथ माता यशोदा और गोवर्धन पर्वत की भी करें पूजा, नोट करें आसान विधि

Published: Fri, 04 Sep 2026 09:37 AM (IST)

4 सितंबर यानी आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व है। इस बार रोहिणी नक्षत्र का खास संयोग बन रहा है। ...और पढ़ें

जन्माष्टमी पर क्या करें? (AI-Generated image)

जन्माष्टमी पर क्या करें? (AI-Generated image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज 4 सितंबर को देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को हुआ था। वैसे तो हर साल जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि होती ही है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग हमेशा नहीं बनता। इस साल यह शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

कैसे करें लड्डू गोपाल की पूजा?

कान्हा जी का जन्म आधी रात को हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की रात घर में मौजूद लड्डू गोपाल का विशेष अभिषेक करना शुभ माना जाता है। इसके लिए दक्षिणावर्ती शंख का इस्तेमाल करना बहुत अच्छा है। शंख में केसर मिला हुआ कच्चा दूध भरकर भगवान को स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें साफ और सुंदर पीले वस्त्र पहनाएं। कान्हा जी को चंदन का तिलक लगाएं और मुकुट पहनाकर मोरपंख से सजाएं।

इनकी भी करें पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण की पूजा के साथ-साथ माता यशोदा, बलराम जी, राधा रानी, गौ माता और गोवर्धन पर्वत की उपासना का भी विधान है। अगर हो सके तो पूजा में इन सभी की मूर्तियां रखें। भोग में नंदलाल को उनका पसंदीदा माखन-मिश्री, दूध की मिठाइयां और ताजे फल अर्पित करें। प्रसाद में तुलसी के पत्ते डालना बिल्कुल न भूलें, क्योंकि तुलसी के बिना कृष्ण भगवान की पूजा अधूरी मानी जाती है। इसके बाद सच्चे मन से धूप-दीप जलाकर आरती करें।

मंत्र जप और पवित्र ग्रंथों का पाठ

पूजा के दौरान 'कृं कृष्णाय नम:' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' और 'राधे-राधे' मंत्रों का कम से कम 108 बार जप करें। जप के लिए तुलसी की माला का इस्तेमाल सबसे अच्छा माना जाता है। इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता या हरिवंश पुराण का पाठ करना भी फलदायी है। भगवान की लीलाओं को पढ़ना और सुनना भी पूजा का ही एक हिस्सा है।

स्नान-दान का महत्व

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन यमुना में स्नान करने की परंपरा काफी पुरानी है। अगर आपके लिए यमुना जी तक जाना संभव नहीं है, तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल या यमुना जल मिलाकर घर पर ही स्नान कर लें। नहाते समय गंगा और यमुना नदी का मन में ध्यान करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।