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जीवन में पुत्री बनकर कौन आती है ? गरुड़ पुराण की ये बात सुनकर हर मां की आंखें हो जाएंगी नम

Published: Sat, 03 Oct 2026 08:06 PM (IST)

गरुड़ पुराण के अनुसार, बेटियां पूर्वजन्म के कर्मों का फल होती हैं और सौभाग्य से प्राप्त होती हैं। उन्हें घर ...और पढ़ें

क्‍यों कहा जाता है बेटी को घर की लक्ष्‍मी? (Picture Credit- AI Generated)

क्‍यों कहा जाता है बेटी को घर की लक्ष्‍मी? (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. बेटियां पूर्वजन्म के कर्मों के रूप में जन्म लेती हैं।

  2. हिंदू धर्म में बेटी को घर की लक्ष्मी कहते हैं।

  3. बेटियां उन पर आती हैं जिन पर पितरों का कर्ज नहीं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में बेटी के जन्म को शुभ और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि बेटा भाग्य से होता है, तो बेटियां सौभाग्य से होती हैं। अलग-अलग हिंदू धार्मिक ग्रंथों में भी बेटियों के जन्म को लेकर कई सारी बातें कही गई हैं। माना जाता है कि जिस घर में बेटी होती है, उस घर में खुशियों, स्नेह और समृद्धि का वास होता है।

हालांकि गरुड़ पुराण के आचार कांड के विभिन्न अध्यायों, विशेषकर गर्भधारण, पुनर्जन्म और कर्म गति से जुड़े अध्यायों में साफ-साफ बताया गया है कि बेटी के रूप में जन्म लेने वाली संतान माता-पिता को संयोग से नहीं बल्कि पूर्वजन्म के कर्मों के रूप में मिलती है। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

पूर्वजन्म का हो सकता है संबंध

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आत्माओं के बीच संबंध केवल एक जन्म तक सीमित नहीं होते। ऐसा माना जाता है कि पिछले जन्म में जिन लोगों के बीच गहरा रिश्ता रहा हो, वे किसी अन्य जन्म में अलग रिश्ते के रूप में एक-दूसरे के जीवन में आ सकते हैं। ऐसे में बेटी के रूप में आने वाली आत्मा का मां या परिवार से पिछले जन्म का कोई गहरा संबंध हो सकता है। यह रिश्ता प्रेम, कर्तव्य या किसी अधूरे कर्म से जुड़ा हुआ माना जाता है।

बेटी को लक्ष्मी का स्वरूप क्यों कहते हैं?

हिंदू धर्म में बेटी को घर की लक्ष्मी कहा जाता है। इसका अर्थ यह है कि बेटी अपने साथ घर में प्रेम, खुशी और नई उम्मीद लेकर आती है। बेटी के जन्म के बाद परिवार में भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है। माता-पिता उसके पालन-पोषण और भविष्य के लिए नए सपने देखने लगते हैं। इसी कारण हिंदू धर्म में बेटी को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

ईश्वर का आशीर्वाद हैं बेटियां

गरुड़ पुराण में इस बात का जिक्र मिलता है कि बेटियां केवल उन लोगों के नसीब में होती हैं, जिन पर अपने पितरों का कोई कर्ज नहीं होता है। वहीं बेटे का जन्म पिता के सिर से पितरों का कर्ज उतारने के लिए होता है। ऐसे में जिन घरों में केवल बेटियां होती हैं, उन माता-पिता पर कोई कर्ज नहीं होता है। हालांकि यह केवल एक धार्मिक मान्यता ही है।

दो परिवारों में खुशियां लाने वाली

हिंदू धर्म में बेटियों को बहुत ही ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण माना गया है। बेटियां होती हैं, जो वंश का नाम आगे ले जाती हैं। बेटियां ही होती हैं, जो नए रिश्‍तों को जोड़ती हैं और परिवार का विस्‍तार करती हैं।

अतः बेटियों के माता-पिता केवल वे लोग ही बनते हैं, जिन पर ईश्वर की कृपा होती है। इसलिए बेटियों को बोझ न समझें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।