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क्या रावण वध की खुशी में खाया जाता है पान? दशहरा की इस अनोखी परंपरा का सच आपको कर देगा हैरान

Published: Tue, 20 Oct 2026 01:18 PM (IST)Updated: Tue, 20 Oct 2026 01:19 PM (IST)

दशहरा पर धर्म की अधर्म पर विजय का पर्व मनाया जाता है, जिसे विजयदशमी भी कहते हैं। उत्तर प्रदेश के ...और पढ़ें

दशहरा पर पान खाने की अनोखी परंपरा, जानें महत्व और क्षेत्रीय मान्यताएं (Picture Credit: AI Generated)

दशहरा पर पान खाने की अनोखी परंपरा, जानें महत्व और क्षेत्रीय मान्यताएं (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. दशहरा पर पान खाना सुख-समृद्धि और विजय का प्रतीक।

  2. पान को माता लक्ष्मी का प्रिय पत्ता माना जाता है।

  3. यह उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों की क्षेत्रीय परंपरा है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में दशहरा के पर्व का विशेष महत्व है और इस दिन को धर्म की अधर्म पर विजय के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जहां एक तरफ श्री राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी वहीं मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। इसी वजह से इस पर्व को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है।

हमारे देश में अलग पर्वों का अलग महत्तव है और उनमें से दशहरा को खास माना जाता है। इस दिन को लेकर कई परम्पराएं हैं और मान्यताएं भी हैं जो अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसार हैं। उन्हीं में से उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों की परंपराएं हैं जिसमें पान खाने को बहुत शुभ माना जाता है। आइए आपको बताते हैं इस अनोखी परंपरा के अनूठे रहस्य के बारे में।

आपसी प्रेम बढ़ाने का तरीका

ऐसी मान्यता है कि दशहरे के दिन पान खाने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और सम्पन्नता आती है। पान को माता लक्ष्मी का प्रिय पत्ता माना जाता है और इसे खाने से संपन्नता बनी रहती है।

यही नहीं इसे आपसी प्रेम बढ़ाने का तरीका माना जाता है। इस दिन लोग एक दूसरे को पान खिलाकर सत्य की विजय की खुशी मनाते हैं। वहीं पान का बीड़ा किसी भी तरह की पूजा में माता लक्ष्मी को अर्पित किया होता है, इसलिए जब दशहरा के दिन पान का बीड़ा चढ़ाया जाता है तो यह माता लक्ष्मी का आह्वाहन करना होता है।

पान खाना शुभता का प्रतीक

दशहरे के दिन पान खाने की परंपरा को शुभता, मंगल और विजय के उत्सव से जोड़कर देखा जाता है। पान भारतीय संस्कृति में लंबे समय से धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों का हिस्सा रहा है। पूजा-पाठ में पान के पत्ते का इस्तेमाल देवी-देवताओं को अर्पित करने और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए किया जाता है।

वहीं दशहरे पर पान खाना विजय और सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन श्री राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी, इसलिए लोग इस खुशी को एक-दूसरे को पान खिलाकर ही मनाते हैं। हालांकि, यह परंपरा कुछ विशेष जगहों जैसे उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों से जुड़ी है और पूरे देश में यह परंपरा नहीं निभाई जाती है।

पान के पत्ते का धार्मिक महत्व

हिंदू धार्मिक परंपराओं में पान के पत्ते को शुभ माना जाता है, इसलिए इसे पूजा, हवन, विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर इसका उपयोग किया जाता है।

कई धार्मिक अनुष्ठानों में पान के पत्ते को श्रद्धा और समर्पण के साथ देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है। दशहरे में पान की परंपरा को इसी शुभता और मंगलकामना के भाव से जोड़ा जाता है।

मान्यता है कि विजयादशमी के दिन शुभ कार्य करने और भगवान श्रीराम का स्मरण करने से जीवन में सकारात्मकता आती है।

दशहरे में पान खाना कोई शास्त्रीय नियम नहीं ही बल्कि यह एक क्षेत्रीय परंपरा पर आधारित है और आपसी प्रेम बढ़ाने का एक माध्यम मानी जाती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।