विदाई से पहले आईने में क्यों देखा जाता है मां दुर्गा का प्रतिबिंब, क्या है 'दर्पण विसर्जन' का अनसुना रहस्य?
विजयदशमी पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन से पहले 'दर्पण विसर्जन' की परंपरा निभाई जाती है। इस रस्म में मां दुर्गा का ...और पढ़ें

विदाई से पहले मां दुर्गा का प्रतिबिंब शीशे में देखने का रहस्य (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
दर्पण विसर्जन विजयदशमी पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन से पहले होता है।
इस रस्म में मां दुर्गा का प्रतिबिंब शीशे में देखा जाता है।
यह माता की आत्मा की उपस्थिति और आध्यात्मिक महत्व दर्शाता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दुर्गा पूजा के समापन के समय मां दुर्गा की विदाई का क्षण भक्तों के लिए बेहद खास होता है। इस दौरान जहां एक तरफ माता के वापस लौटने के बारे में सोचकर मन भावुक हो उठता है, वहीं इस दौरान माता की विदाई से जुड़ी कुछ ऐसी रस्में भी होती हैं जो इस अवसर को और खास बनाती हैं।
विजयदशमी के दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन से पहले कई बंगाली पूजा पंडालों में एक विशेष रस्म निभाई जाती है, जिसे दर्पण विसर्जन कहा जाता है। यह भी उन परंपराओं का एक हिस्सा है जो माता दुर्गा के ससुराल लौटने से पहले निभाई जाती हैं।
इस परंपरा में दर्पण यानी शीशे के माध्यम से मां दुर्गा के प्रतिबिंब और चरणों के दर्शन किए जाते हैं और माना जाता है कि उसी दर्पण में माता की आत्मा विराजमान है। आइए आपको बताते हैं इस रस्म की खास बात क्या है?
क्या होता है दर्पण विसर्जन?
दर्पण विसर्जन दुर्गा पूजा की एक पारंपरिक रस्म है, जो विशेष रूप से बंगाल और आस-पास के क्षेत्रों में निभाई जाती है। विजयदशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन से पहले एक दर्पण में देवी की प्रतिमा का प्रतिबिंब उतारा जाता है और माता के चरणों के दर्शन शीशे के माध्यम से किए जाते हैं। कुछ स्थानों पर इस दौरान भक्त माता के चरणों को आईने में देखकर प्रणाम करते हैं और उनका आशीर्वाद मांगते हैं।
मां दुर्गा का प्रतिबिंब दर्पण में क्यों देखा जाता है?
ऐसा माना जाता है कि जिस तरह से आत्मा नश्वर है और शरीर पीछे छूट जाता है। उसी तरह से शीशे में माता दुर्गा का प्रतिबिंब उतारकर ऐसा माना जाता है कि माता दुर्गा की आत्मा उस आईने में है और भक्त उस आईने को माता की उपस्थिति के रूप में पूजते हैं।
वहीं मूर्ति को विसर्जित किया जाता है जैसे आत्मा से शरीर अलग होने के बाद उसका विसर्जन होता है। यह रस्म इसलिए निभाई जाती है जिससे माता की प्रतिमा का विसर्जन होने के बाद भी उनकी आत्मा हमेशा मौजूद रहे और भक्तों के बीच रहे।
दर्पण विसर्जन का महत्व क्या है?
दुर्गा विसर्जन के समय दर्पण विसर्जन को इस भाव से जोड़कर देखा जाता है कि माता दुर्गा की उपस्थिति केवल मिट्टी की प्रतिमा नहीं है। इस तरह से प्रतिमा का विसर्जन होता है, लेकिन भक्तों के मन में मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा समाप्त नहीं होती।
यह रस्म मां दुर्गा की विदाई को केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव है। दर्पण में देवी के दर्शन भक्तों को यह याद दिलाते हैं कि मां का आशीर्वाद और उनकी शक्ति उनके जीवन में हमेशा बनी रहे।
दर्पण विसर्जन दुर्गा पूजा की एक भावपूर्ण परंपरा है, जो भक्ति, समर्पण और मां दुर्गा के दोबारा आगमन की प्रतीक्षा का संदेश देती है।
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