सूरन की सब्जी से दीपदान तक! उत्तर प्रदेश में ऐसे मनाई जाती है दीवाली; देखें लक्ष्मी पूजन विधि और जरूरी सामग्री
उत्तर प्रदेश में दीवाली का त्योहार सूरन की सब्जी, दीपदान और अलैया-बलैया जैसी अनूठी परंपराओं के साथ मनाया जाता है। ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश में कैसे मनाई जाती है दिवाली, पूजा विधि के साथ पूरी सामग्री लिस्ट (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
उत्तर प्रदेश में दीवाली पर सूरन की सब्जी बनाना अनिवार्य।
दीवाली की शाम घरों और मंदिरों में दीपदान का विशेष महत्व।
लक्ष्मी-गणेश पूजन की विधि और आवश्यक सामग्री की जानकारी।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब बात दीपोत्सव की आती है, तो हर एक जगह दीवाली मनाने का अपना अलग तरीका और प्रथा है। वैसे तो यह पर्व पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन जब बात उत्तर प्रदेश की आती है तो इस पर्व का अलग ही जलवा होता है। घर में महीनों पहले से होने वाली साफ-सफाई से लेकर दीवाली के दिन घर से बुरी नजर को दूर करने की अलैया-बलैया की अनोखी परंपरा, यहां की दीपावली का एक अलग ही चित्र प्रस्तुत करती है।
यही नहीं जब दीवाली का पर्व है, तो सूरन की सब्जी न बने तो मानो कुछ अधूरा सा है। कुछ ऐसी खास होती है यहां की दीवाली और इससे जुड़ी परम्पराएं। आइए आपको बताते हैं इस राज्य की दीवाली परंपरा की खासियत क्या है और माता लक्ष्मी की पूजा विधि के साथ जरूरी सामग्री की जानकारी भी लें।
दीवाली में सूरन की सब्जी बनाना जरूरी
उत्तर प्रदेश में जब बात दीवाली की आती है तब लोग बाजार में सूरन यानी जिमीकंद ढूढ़ने लगते हैं। मानो इसके बिना कुछ अधूरा सा ही लगता है।
लोक मान्यता है कि सूरन जमीन के अंदर से उगता है और दीवाली के दिन इसकी सब्जी बनाने से समृद्धि और खुशहाली आती है। इसकी एक खास बात यह भी है कि इसे काटने के बाद भी दोबारा उगाया जा सकता है। इसी वजह से इसे वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
दीवाली पर दीपदान का विशेष महत्व
उत्तर प्रदेश में दीवाली की शाम को घरों के मुख्य द्वार, आंगन, तुलसी के पौधे और मंदिरों में दीपक जलाए जाते हैं। यही नहीं यहां गोधूलि बेला में सात दीपक घर के आंगन या बालकनी में गंगा जी के नाम से भी दीपक जलाए जाते हैं। कई जगहों पर मंदिरों, नदियों और पवित्र स्थलों पर भी दीपदान किया जाता है।
दीवाली पर माता लक्ष्मी की पूजा विधि
उत्तर प्रदेश में दीवाली की शाम मुख्य रूप से शुभ मुहूर्त में माता लक्ष्मी और गणपति की पूजा एक साथ की जाती है। आइए जानें पूजा विधि क्या है-
- दीवाली की पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थल की सफाई करके चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। आप इसी चौकी पर पिछले साल के लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा भी रखें। ध्यान रखें माता लक्ष्मी की प्रतिमा गणेश जी के दाहिनी ओर रखी होनी चाहिए।
- भगवान गणेश और मां लक्ष्मी को फूल और माला अर्पित करें। मां लक्ष्मी को मुख्य रूप से कमल का फूल और 5 पान के पाते चढ़ाएं।
- इसके बाद धूप-दीप जलाकर पहले गणपति की पूजा करें और उसके बाद माता लक्ष्मी का पूजन श्रद्गा से करें।
- श्री गणेश और माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें और पूजा के समापन पर पूरे परिवार सहित आरती करें।
- अंत में परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करें और माता लक्ष्मी को भोग में खीर और गणपति को मोदक चढ़ाएं।
लक्ष्मी पूजन की जरूरी सामग्री
दीवाली पर पूजा के लिए मुख्य रूप से माता लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति, रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, मौली, फूल, माला, कमल का फूल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, नारियल, आम के पत्ते, गंगाजल, धूप, दीपक, घी, रुई की बाती, कपूर, मिठाई, फल, खील-बताशे रखें और पूजा की थाली तैयार करें।
इस प्रकार उत्तर प्रदेश में दीवाली का त्योहार धार्मिक आस्था, पारंपरिक खानपान और दीपदान की परंपराओं के साथ मनाया जाता है। अगर आप भी पूजा की सामग्री पहले से ही ले आएं और यहां बताई विधि से पूजन करें, तो आपके लिए त्योहार का मजा दोगुना हो जाएगा।
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