देवी पक्ष 2026: महालया पर हर घर में क्यों बजता है 'या देवी सर्वभूतेषु' ,जानें चंडी पाठ का रहस्य
महालया पितृ पक्ष की समाप्ति और देवी पक्ष की शुरुआत का प्रतीक है, जब मां दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं। ...और पढ़ें

क्या है महालया का महत्व ? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
महालया पितृ पक्ष की समाप्ति, देवी पक्ष की शुरुआत का प्रतीक।
'या देवी सर्वभूतेषु' मंत्र देवी की सर्वव्यापी शक्ति का वर्णन।
चंडी पाठ महिषासुर वध, बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महालया हिंदू धर्म का एक पावन पर्व है, जो पितृ पक्ष की समाप्ति और देवी पक्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष महालया 10 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जा रही है। इस दिन सुबह से ही कई घरों में मां दुर्गा की आराधना, मंत्रों का जाप और चंडी पाठ सुनाई देता है। खासतौर पर बंगाल में महालया का विशेष महत्व है। यहां सुबह-सुबह रेडियो और अन्य माध्यमों पर देवी दुर्गा की स्तुति सुनने की परंपरा भी लोकप्रिय है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि महालया की सुबह 'या देवी सर्वभूतेषु' मंत्र का पाठ क्यों किया जाता है? इसके पीछे धार्मिक आस्था, पौराणिक कथाएं और गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा है। चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
'या देवी सर्वभूतेषु' मंत्र का क्या है रहस्य?
'या देवी सर्वभूतेषु' मंत्र दुर्गा सप्तशती में देवी की महिमा का वर्णन करने वाले प्रसिद्ध स्तोत्र का एक हिस्सा है। इस मंत्र की पंक्तियां हैं कुछ इस प्रकार हैं-
"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
अर्थ- इसका अर्थ है कि जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में निवास करती हैं, उन्हें हम बार-बार प्रणाम करते हैं।
इस स्तुति में देवी को केवल मंदिरों में विराजमान एक मूर्ति नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव के भीतर मौजूद दिव्य ऊर्जा के रूप में देखा गया है। देवी को बुद्धि, चेतना, शांति, श्रद्धा, दया और मातृत्व जैसे गुणों का प्रतीक माना जाता है। महालया पर इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति अपने भीतर मौजूद शक्ति को पहचान पाता है और जीवन में साहस, सकारात्मकता तथा सद्बुद्धि पाने का देवी से आशीर्वाद मांगता है।
मां दुर्गा के पृथ्वी पर आगमन का संदेश
हिंदू धर्म की मान्यता अनुसार, महालया से मां दुर्गा के भक्तों के बीच आने की प्रतीक्षा शुरू हो जाती है। शारदीय दुर्गा पूजा के दौरान भक्त मां का स्वागत अपनी बेटी के रूप में करते हैं। ऐसा माना जाता है देवी दुर्गा इस समय अपने मायके आती हैं और उनका धूमधाम से स्वागत होता है। इस दौरान मां दुर्गा अपने बच्चों गणेश, कार्तिकेय, लक्ष्मी और सरस्वती के साथ पृथ्वी पर आती हैं। भक्त उनके स्वागत के लिए घरों और पूजा पंडालों को सजाते हैं तथा मां से सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं।
चंडी पाठ का रहस्य और धार्मिक महत्व
चंडी पाठ को दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कहा जाता है। इसमें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों, उनकी शक्तियों और दुष्ट शक्तियों पर विजय की कथाओं का वर्णन मिलता है। इसका मुख्य संदेश है कि अन्याय और अहंकार चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है।
महिषासुर पर विजय का संदेश
पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर के अत्याचारों से परेशान देवताओं ने अपनी शक्तियों का तेज एकत्र किया। इसी दिव्य तेज से मां दुर्गा प्रकट हुईं और उन्होंने महिषासुर का वध किया। यह कथा बुराई पर अच्छाई की जीत की प्रेरणा देती है।
अत: इस तरह महालया हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और नए उत्साह के साथ जीवन की शुरुआत करने का संदेश देता है।
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