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मिट्टी, तांबा या पीतल, नवरात्र में कौन सा कलश देगा मां दुर्गा का आशीर्वाद ? स्‍थापना से पहले जान लें रहस्‍य

Published: Sat, 10 Oct 2026 09:00 AM (IST)

शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना का विशेष महत्व है, जिसमें मिट्टी, तांबे और पीतल में से किस चीज का कलश रखना सही रहता है, चलिए जानते हैं।

नवरात्र में कलश स्थापना  (Picture Credit- AI Generated)

नवरात्र में कलश स्थापना (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि कलश स्थापना के साथ ही घर में नौ दिनों तक देवी जी की आराधना चलती है। माना जाता है कि कलश को सुख-समृद्धि, खुशहाली और शुभता का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि नवरात्र में कलश स्थापना के लिए लोग खास तैयारी करते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नवरात्र में मिट्टी, तांबे या पीतल में से किस कलश का इस्तेमाल करना सबसे शुभ माना जाता है? एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी बृज गौतम के अनुसार, कलश पूर्णता, समृद्धि, जीवन और मंगल का प्रतीक है। इसके लिए इस्तेमाल होने वाले पदार्थ का चयन धार्मिक परंपरा और सुविधा के अनुसार किया जा सकता है। आइए जानते हैं अलग-अलग कलश का धार्मिक महत्व।

मिट्टी का कलश

नवरात्र में मिट्टी के कलश का इस्तेमाल करना एक पारंपरिक विकल्प है। मिट्टी को पृथ्वी तत्व का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इसे प्राकृतिक, सात्विक और सादगी का प्रतीक माना जाता है। 

मिट्टी के कलश में जल भरकर पूजा करना और उसके ऊपर नारियल रखना कई जगहों पर प्रचलित है। मिट्टी का कलश आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है।

मान्यता है कि मिट्टी का कलश प्रकृति से जुड़ाव रखता है इसलिए इसे स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। अगर आप पारंपरिक तरीके से कलश स्थापना करना चाहते हैं, तो मिट्टी का कलश चुन सकते हैं।

तांबे का कलश: ऊर्जा और शुद्धता का प्रतीक

पूजा-पाठ में तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। धार्मिक मान्यताओं में तांबे को सूर्य और अग्नि तत्व से जोड़ा जाता है। इसे ऊर्जा, तेज और शुद्धता का प्रतीक भी माना जाता है।

नवरात्र में तांबे के कलश से पूजा करने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। इसे शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयोगी माना जाता है। अगर आपके घर में तांबे का कलश पहले से मौजूद है, तो आप उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। 

पीतल का कलश: शुभता और मंगल का प्रतीक

पीतल का कलश भी पूजा-पाठ में खूब इस्तेमाल किया जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों में पीतल को शुभ और पवित्र माना जाता है। इसी वजह से कई घरों में पूजा के लिए पीतल के बर्तन अलग से रखे जाते हैं।

नवरात्र में पीतल के कलश से स्थापना करना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसे लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है और इसकी देखभाल करना भी आसान होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश का महत्व उसकी धातु से ज्यादा पूजा में रखी गई श्रद्धा और नियमों से होता है।


अत: ज्योतिषाचार्य के अनुसार, मिट्टी, तांबे और पीतल के कलश तीनों का अपना महत्व है। इसलिए किसी एक को धन प्राप्ति के लिए सबसे अच्छा बताना उचित नहीं होगा।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।