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पति-पत्‍नी में नहीं होंगे झगड़े, सुखी गृहस्‍थ जीवन के लिए आचार्य चाणक्‍य ने बताई हैं ये नीतियां

Published: Wed, 16 Sep 2026 06:31 PM (IST)

आचार्य चाणक्य ने सुखी वैवाहिक जीवन के लिए सम्मान, धैर्य और आपसी समझ जैसी महत्वपूर्ण नीतियां बताई हैं। इन सिद्धांतों ...और पढ़ें

आचार्य चाणक्य की नीतियों से पाएं सुखी वैवाहिक जीवन । (Picture Credit- AI Generated)

आचार्य चाणक्य की नीतियों से पाएं सुखी वैवाहिक जीवन । (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. एक-दूसरे का सम्मान करें, अपमान से बचें, भावनाओं का ध्यान रखें।

  2. गुस्से में धैर्य रखें, शांत रहने से झगड़े टलेंगे।

  3. अहंकार त्यागें, गलती स्वीकारने से रिश्ता मजबूत होता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पति-पत्नी का रिश्ता बहुत ही खट्टा-मीठा होता है। इसमें प्रेम, विश्वास और आपसी समझ के साथ-साथ बहुत जरूरी होता है एक-दूसरे का साथ देना, तब ही गृहस्‍थ जीवन की गाड़ी आगे चल पाती है। हालांकि, वैवाहिक जीवन में छोटी-मोटी असहमति होना सामान्य है, लेकिन यदि बात-बात पर पति-पत्‍नी के बीच विवाद होता है, तो रिश्ते में तनाव बढ़ सकता है।

आचार्य चाणक्य की नीतियों में परिवार और दांपत्य जीवन को लेकर भी कई ऐसी बातें बताई गई हैं, जिनका उद्देश्य संयम और जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है। तो अगर आप भी अपनी मैरिड लाइफ को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो आपको भी एक बार इन नीतियों को जान लेना चाहिए।

एक-दूसरे का सम्मान करें

सुखी दांपत्य जीवन के लिए पति-पत्नी के बीच सम्मान बहुत जरूरी है कि दोनों एक-दूसरे की कमियों का मजाक उड़ाने या सबके सामने एक दूसरे का अपमान करने की जगह, एक-दूसरे की रिस्‍पेक्‍ट करें । ताकि रिश्ते में दूरी पैदा न हो। पति-पत्नी को अपनी बात रखते समय सामने वाले की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। असहमति होने पर भी अपशब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए। सम्मान केवल दूसरों के सामने नहीं, बल्कि अकेले में भी बनाए रखना जरूरी है।

गुस्से में धैर्य रखें

यदि किसी बात पर पति-पत्‍नी के बीच विवाद हो जाए, तो दोनों में से किसी एक को शांत हो जाना चाहिए। यदि दोनों एक साथ गुस्से में आ जाएंगे, तो छोटी बात भी बड़ा झगड़ा बन सकती है। इसलिए जब एक साथी नाराज हो, तो दूसरे को कुछ समय शांत रहने की कोशिश करनी चाहिए। गुस्से में तुरंत जवाब देने के बजाय थोड़ी देर रुककर बात करना बेहतर होता है।

हर बात पर बहस न करें

पति-पत्नी के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। लेकिन हर छोटी बात को प्रतिष्ठा का सवाल मत बनाएं। इससे रिश्‍तों को मजबूत बनाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे विषय जिनका परिवार या भविष्य पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता, उन पर लगातार बहस करने से अपनी ऊर्जा को व्‍यर्थ करना होता है। जरूरी मुद्दों पर शांतिपूर्वक बातचीत करना अधिक उपयोगी हो सकता है।

मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ दें

रिश्ते की वास्तविक मजबूती कठिन परिस्थितियों में दिखाई देती है। आर्थिक परेशानी, नौकरी का तनाव, पारिवारिक समस्या या किसी अन्य कठिन समय में पति-पत्नी को एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए। मुश्किल समय में एक दूसरे के दोष निकालने के बजाय समस्या का समाधान मिलकर खोजने से आपसी विश्वास मजबूत हो सकता है। यह भावना दांपत्य जीवन में सुरक्षा और अपनापन बढ़ाती है।

अहंकार को रिश्ते से दूर रखें

अहंकार रिश्‍तों के बीच एक बहुत बड़ी दीवार है। पति-पत्नी के बीच यदि अहंकार होगा, तो दूरी बढ़ना तय है। हर विवाद में अपनी ही बात को सही साबित करने की कोशिश करने से रिश्‍ते में ज्‍यादा समस्या आ सकती है। कभी पति को अपनी गलती स्वीकार कर लेनी चाहिए, तो कभी पत्‍नी को मान लेना चाहिए कि वो भी गलत हो सकती है। गलती मान लेना आपको कमजोर नहीं दिखाता है। रिश्ते को बचाने के लिए दोनों को जरूरत पड़ने पर समझौता और बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।

अत: सम्मान, संयम, विश्वास, सहयोग और संवाद पति-पत्नी के रिश्ते में जरूरी है। पति-पत्नी अगर एक-दूसरे की बात सुनें, गुस्से में संयम रखें, बेवजह बहस से बचें और कठिन समय में साथ खड़े रहें तो रिश्ते में समझ और भरोसा बढ़ सकता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है