Chaitra Navratri 2026 का दूसरा दिन है बेहद खास, पढ़ें मां ब्रह्मचारिणी की कथा और पूजा के नियम
चैत्र नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। मान्यता है कि आज के दिन उनकी पूजा करने से ...और पढ़ें
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Chaitra Navratri 2026 Day 2: नवरात्र के दूसरे दिन का महत्व (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेक्स, नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र का पावन त्योहार हमारे बीच है और आज इस उत्सव का दूसरा दिन है। यह दिन पूरी तरह से मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप, मां ब्रह्मचारिणी (Maa Brahmacharini) को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त आज के दिन मां की सच्ची श्रद्धा से पूजा करता है और उनकी कथा सुनता है, उसके जीवन में संयम, तप और विजय की प्राप्ति होती है।
दूसरे दिन का महत्व
- आज के दिन मां की पूजा करने से भक्तों में तप, त्याग, वैराग्य और सदाचार जैसे गुणों की वृद्धि होती है। अगर आप किसी कठिन लक्ष्य की प्राप्ति में लगे हैं, तो मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान आपको मानसिक शक्ति प्रदान करेगा।
- 'मार्कंडेय पुराण' और 'श्री दुर्गा सप्तशती' के कवच पाठ के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी का जन्म हिमालय राज के घर हुआ था। नारद जी के उपदेश पर उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की।
- उन्होंने एक हजार साल तक केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक जमीन पर रहकर शाक (सब्जियां) खाईं।
- घनघोर तप के कारण उनका शरीर बहुत क्षीण हो गया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसी कठिन तपस्या के कारण उनका नाम 'ब्रह्मचारिणी' पड़ा।
- ब्रह्मा जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनकी मनोकामना पूर्ण होगी और भगवान शिव उन्हें पति के रूप में प्राप्त होंगे।
मां ब्रह्मचारिणी की पावन कथा
प्रचलित पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मचारिणी माता हिमालय और देवी मैना की बेटी हैं। नारद मुनि के कहने पर उन्होंने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए बहुत कठिन तपस्या की। इसी कठोर तपस्या के कारण उन्हें तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी के नाम से जाना जाता है।
ऐसा कहा जाता है कि अपनी तपस्या के दौरान, उन्होंने तीन हजार साल तक सिर्फ टूटे हुए बिल्व पत्र खाएं। हर दुख सहकर भी वह भगवान शंकर की भक्ति में लगी रहीं। बाद में उन्होंने बिल्व पत्र भी खाना छोड़ दिया और कई हजार साल तक बिना पानी और भोजन के तपस्या करती रहीं। इस कारण उनका एक नाम अपर्णा भी पड़ा।

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उनकी घोर तपस्या देखकर देवता, ऋषि और मुनि बहुत हैरान हुए। उन्होंने उनकी तपस्या की खूब सराहना की और कहा कि उनकी तपस्या जरूर सफल होगी। कुछ समय बाद ऐसा ही हुआ और उन्हें भगवान शंकर पति के रूप में मिले। ऐसा माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से हर तरह की सिद्धि मिलती है।
ब्रह्मचारिणी माता के पूजन मंत्र
1. ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी।
सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते।।
2. या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
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