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क्या कुंवारी लड़कियां रख सकती हैं करवा चौथ का उपवास? रुकिए! व्रत शुरू करने से पहले पढ़ें ये कड़े नियम

Published: Mon, 26 Oct 2026 07:30 PM (IST)

करवा चौथ का व्रत कुंवारी लड़कियां भी रख सकती हैं, लेकिन उनके लिए निर्जला उपवास और चांद दर्शन के नियम ...और पढ़ें

कुंवारी लड़कियां कैसे रखें करवा चौथ व्रत? (Picture Credit: AI Generated)

कुंवारी लड़कियां कैसे रखें करवा चौथ व्रत? (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. कुंवारी लड़कियां निर्जला नहीं, फलाहार व्रत करें।

  2. चांद की बजाय शिव-पार्वती की पूजा करें।

  3. सरगी और छलनी से चांद देखने का नियम नहीं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। करवा चौथ को मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं का उपवास माना जाता है। इस दिन हर शादीशुदा महिला पति की दीर्घायु की कामना में निर्जला उपवास करती है और चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोलती है। वहीं आजकल कुंवारी लड़कियों का भी इस दिन व्रत करने का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है।

कुछ लड़कियां यह व्रत अपने मंगेतर के लिए करती हैं, तो कुछ अच्छे जीवनसाथी की कामना में। वहीं मन में अक्सर एक सवाल यह आता है कि क्या इस व्रत को अविवाहित लड़कियां भी कर सकती हैं?

यदि हम शास्त्रों और पौराणिक कथाओं की मानें तो यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं को ही करना चाहिए, लेकिन अगर कुंवारी लड़कियां भी इस व्रत को करना चाहती हैं तो उनके लिए कुछ अलग नियम बनाए गए हैं। आइए जानें उन नियमों के बारे में जिससे किसी तरह का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

कुंवारी लड़कियां करवा चौथ का व्रत कर सकती हैं?

अगर अविवाहित लड़कियां अच्छे पति की कामना में यह व्रत करना चाहती हैं तो अवश्य करें, लेकिन उनके लिए निर्जला व्रत करने का कोई विधान शास्त्रों में नहीं लिखा है। कुंवारी लड़कियां इस दिन व्रत करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकती हैं।

इस दिन आप चांद की पूजा करने के बजाय शिव जी और गौरी माता की पूजा का संकल्प करें और उनसे अच्छे वर का आशीर्वाद लें। यदि आपकी सगाई हो चुकी है और शादी में कुछ ही दिन बचे हैं, तो इस व्रत को किया जा सकता है। हालांकि, इस स्थिति में भी निर्जला उपवास करने की कोई बाध्यता नहीं है। आप दिनभर फलाहार का सेवन करते हुए व्रत का पालन कर सकती हैं।

कुंवारी लड़कियों के लिए करवा चौथ व्रत के नियम

अगर आपकी शादी नहीं हुई है, तो आपको करवा चौथ के व्रत का संकल्प लेते समय कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। आइए जानें उनके बारे में-

  • आपके लिए चांद दर्शन के बाद व्रत खोलने जैसा कोई नियम लागू नहीं होता है। करवा चौथ के दिन आप प्रातः उठकर स्नान आदि से मुक्त होकर व्रत का संकल्प लें।
  • आप इस दिन निर्जला उपवास न करें बल्कि फलाहार के साथ व्रत करें। करवा चौथ का व्रत सिर्फ सुहागिन महिलाओं को ही निर्जला रखना चाहिए। इस दिन आप यदि व्रत करें तो अन्न का सेवन न करें।
  • करवा चौथ के व्रत की शुरुआत सुहागिन महिलाओं के लिए सरगी से होती है, लेकिन कुंवारी लड़कियों को सरगी नहीं ग्रहण करनी चाहिए। यह सरगी ससुराल से आती है, इसलिए इसे विवाहित महलाएं ही ग्रहण कर सकती हैं।
  • करवा चौथ के व्रत में छलनी से चांद देखने की परंपरा है, लेकिन कुंवारी लड़कियों को ऐसी किसी परंपरा का पालन नहीं करना चाहिए। अविवाहित लड़कियां यदि चाहें, तो चंद्रमा को अर्घ्य दे सकती हैं।
  • अविवाहित लड़कियों के लिए करवा चौथ के दिन चांद के दर्शन करके ही व्रत खोलने जैसा कोई विधान नहीं बनाया गया है, यह केवल सुहागिन महिलाओं के लिए है।
  • कुंवारी लड़कियों को इस व्रत के दिन थाली या करवा फेरने जैसी किसी रस्म में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। यदि व्रत करें भी तब भी इन रस्मों में शामिल न हों।
  • शादी से पहले करवा चौथ का व्रत केवल माता पार्वती और भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए किया जा सकता है।

अगर कुंवारी लड़कियां करवा चौथ का व्रत करना चाहती हैं, तो यहां बताए नियमों का पालन करना आपके लिए अत्यंत जरूरी है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।