श्रीकृष्ण की सीख: सुबह के सिर्फ 10 मिनट और एक शांत कोना बदल सकते हैं आपका पूरा दिन
भगवद्गीता के अध्याय 6, श्लोक 12 के अनुसार, सुबह की शुरुआत स्थिर आसन पर बैठकर, मन को एकाग्र कर और विचारों पर नियंत्रण करके शांतिपूर्ण बनाई जा सकती है।

मन को एकाग्र करने का तरीका भगवद्गीता में (Picture Credits- AI Images)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अधिकतर परिवारों में सुबह की शुरुआत काफी दौड़-भाग से होती है। अलार्म बजने के साथ ठीक से जागने से पहले ही फोन में मैसेज भर जाता है। 8 बजते-बजते दिन तय समय से पीछे लगने लगता है।
इसी समस्या का हल भगवद्गीता के चैप्टर 6 और श्लोक 12 में देखने को मिलता है, जब भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि स्थिर आसन पर बैठने, मन को एकाग्र करने और विचारों और इंद्रियों पर काबू पाने की सलाह देते हैं। वे कहते हैं कि इस तरह प्रैक्टिस करने से अंदर का मन शुद्ध और शांत होता है। यह सलाह आसान है और यह किसी भी दिन के पहले कुछ मिनटों में बेहद आसानी से की जा सकती है।
एक निश्चित स्थान क्या सहायता करता है?
मन को शांत करने के लिए किसी भी तरह की बड़ी चीज करने की जरूरत नहीं है। आपको बेडरूम में कोई भी कोना या बालकनी के दरवाजे के पास रखी कुर्सी अच्छी रहती है। आपको रोजाना सुबह उसी स्थान पर वापस जाने से मन को पता चल जाता है कि आगे क्या होने वाला है।
भगवान श्रीकृष्ण ने एकाग्र शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि मन को एक जगह इक्ट्ठा होना। यानी सुबह के समय यह सबसे आसानी से होता है, दिन भर का शोर-शराबा होने से पहले। एक शांत स्थान को चुनें। सांसों पर नियंत्रण रखें और ईश्वर से छोटी-छोटी प्रार्थना करें। इससे मन शांत होने के साथ एकाग्र होता है।
सुबह उठते ही स्क्रीन अनलॉक कर मैसेज और न्यूज सुनने की आदत से बचें। एक शांत सुबह पूरे दिन के मूड को निर्धारित करती है। रोजाना 10 मिनट की शांति अक्सर महीने में एक बार लंबे सेशन से ज्यादा मायने रखती है। इसलिए उठने के आधे घंटे तक फोन से दूरी बनाकर ही रखें।
भगवद्गीता का चैप्टर 6 मेडिटेशन से जुड़ा है। कृष्ण कर्म पर बड़ी शिक्षाओं के साथ-साथ जीवन में प्रैक्टिकल स्टेप्स लेने के लिए भी प्रेरित करते हैं। कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध भूमि में लड़ने से पहले कहा था कि, एक योद्धा को भी एक्शन से पहले शांत रहना पड़ता है।
भगवद्गीता की इस प्रैक्टिस को करके आप भी बेवजह के मानसिक तनाव और अशांति से बच सकते हैं।
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