अहोई अष्टमी पर चांद नहीं, तारों को देखकर ही क्यों खोला जाता है व्रत? 99% माताएं इस रहस्य से होंगी अनजान
अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। इस व्रत में चांद ...और पढ़ें

अहोई अष्टमी पर तारों को देखकर ही क्यों खोला जाता है व्रत? (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
संतान की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत।
तारों को देखकर व्रत खोलने का विशेष महत्व।
बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना से जुड़ा रहस्य।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। करवा चौथ के व्रत के चार दिन बाद कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। जिस तरह से सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत करती हैं उसी तरह से अहोई अष्टमी का व्रत संतान की दीर्घायु की कामना में किया जाता है।
इस दिन माताएं बच्चों की अच्छी सेहत और दीर्घायु की कामना में निर्जला उपवास करती हैं और तारों को अर्घ्य देने और उनकी पूजा करने के बाद व्रत का पारण करती हैं। अक्सर मन में एक सवाल आता है कि आखिर क्यों इस व्रत को तारों की पूजा के बाद खोला जाता है और इसमें चांद दर्शन का विधान क्यों नहीं है? आइए आपको बताते हैं सदियों से चली आ रही इस परंपरा का गूढ़ रहस्य क्या है?
अहोई अष्टमी पर तारों को देखकर ही क्यों खोला जाता है व्रत?
इस धारणा के पीछे का रहस्य यह है कि जिस तरह से आकाश में तारे हमेशा टिमटिमाते रहते हैं उसी तरह से तारों के समान ही माताओं की संतान का भविष्य भी उज्जवल बने। इसी कामना के साथ अहोई अष्टमी के दिन तारों की पूजा करके उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ ही तारों से ही संतान की दीर्घायु की कामना की जाती है।
तारों को अहोई माता की संतान माना जाता है और जिस प्रकार तारों के ऊपर माता का आशीर्वाद सदैव बना रहता है, उसी तरह से बच्चों पर भी उनका आशीर्वाद बना रहे इस बात की कामना की जाती है।
अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य देने का महत्व
इस दिन तारों को अर्घ्य देते हुए माताएं प्रार्थना करती हैं कि उनके कुल में भी ऐसी संतानें हों, जो तारों के समान सदैव चमकती रहें और उनका प्रकाश कभी धूमिल न हो।
संतान का जीवन हमेशा खुशहाली से भरपूर हो। जिस तरह से यह कहा जाता है कि तारों के बिना आकाश अधूरा है उसी प्रकार से बच्चों के बिना माता-पिता का अस्तित्व नहीं होता है, इसलिए तारों को अर्घ्य देते हुए बच्चों की सलामती की प्रार्थना की जाती है। तारों को अर्घ्य देना इस दिन बहुत ही शुभ माना जाता है और इससे संतान का जीवन भी भाग्यपूर्ण होता है।
अहोई अष्टमी व्रत कैसे किया जाता है?
अहोई अष्टमी पर माताएं सुबह से ही निर्जला व्रत का पालन करती हैं और इस दिन स्याहु माला धारण करके पूजा की जाती है। पूरे दिन इस व्रत को करने के बाद गोधूलि बेला में तारों के दर्शन करके उन्हें अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इस दिन पूजा के समय अहोई अष्टमी की व्रत कथा का पाठ करना भी जरूरी होता है। अहोई माता को भोग में मीठी चीजें अर्पित करें।
यदि आप भी अहोई अष्टमी का व्रत करती हैं, तो यहां बताई बातों का ध्यान रखना जरूरी है जिससे व्रत को पूर्णता मिले।
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