संतान की तरक्की के लिए कब रखा जाएगा अहोई अष्टमी व्रत? अभी जान लें डेट और पूजा का शुभ मुहूर्त
संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए अहोई अष्टमी व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है।

अहोई अष्टमी व्रत से होती है संतान सुख की प्राप्ति (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कार्तिक माह का विशेष महत्व है। इस पवित्र माह में कई व्रत और पर्व मनाए जाते हैं, जिनमें अहोई अष्टमी का त्योहार भी प्रमुख है। इस व्रत को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2026) व्रत किया जाता है।
सुहागिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए यह व्रत विधिपूर्वक रखती हैं। इस दिन अहोई माता की पूजा-अर्चना करने का विधान है। शाम को तारों के दर्शन कर अर्घ्य दिया जाता है और इसके बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को सच्चे मन से करने पर संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल अहोई अष्टमी का व्रत किस दिन रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है।
अहोई अष्टमी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 01 नवंबर को दोपहर 02 बजकर 51 मिनट पर होगी। वहीं, तिथि का समापन 02 नवंबर को दोपहर 01 बजकर 10 मिनट पर होगा। ऐसे में अहोई अष्टमी व्रत 01 नवंबर को किया जाएगा।
पूजा करने का शुभ मुहूर्त- शाम 05 बजकर 36 मिनट से शाम 06 बजकर 54 मिनट तक
तारों को देखने का समय- शाम 06 बजे
अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय - रात को 11 बजकर 40 मिनट पर
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 49 मिनट से 05 बजकर 41 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 27 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 01 बजकर 55 मिनट से 02 बजकर 39 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 02 मिनट तक
अमृत काल- रात 10 बजकर 25 मिनट से 11 बजकर 56 मिनट तक
अहोई अष्टमी के दिन क्या करें?
- इस दिन सुबह स्नान करने के बाद सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- हाथ में जल लेकर सच्चे मन से निर्जला व्रत का संकल्प लें।
- पूजा के स्थान पर अहोई माता का चित्र बनाएं या तस्वीर स्थापित करें और उसके सामने दीपक जलाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।
- आरती करने के बाद माता को हलवा, पूरी या अन्य सात्विक चीजों का भोग लगाएं।
- अपनी संतान की लंबी आयु और तरक्की के लिए अहोई माता से प्रार्थना करें।
- तारे निकलने पर एक लोटे में शुद्ध जल, चावल, फूल, दूध और गंगाजल मिलाकर तारों को अर्घ्य दें।
- इस दिन मंदिर में या गरीब लोगों को विशेष चीजों का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और धन लाभ के योग बनते हैं।
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