Ahoi Ashtami 2026: गन्ने और मूली के बिना अधूरी है अहोई अष्टमी की पूजा, जानें इसके पीछे का धार्मिक महत्व और लाभ
अहोई अष्टमी पर गन्ने और मूली की पूजा का विशेष महत्व है। संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए ...और पढ़ें

अहोई अष्टमी व्रत में गन्ने और मूली का विशेष महत्व है। (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं और पूरे दिन व्रत रखकर शाम को तारों को देखकर व्रत का पारण करती हैं।
इस पर्व में पूजा-पाठ के साथ कुछ खास चीजों का भी विशेष महत्व होता है। इनमें गन्ना और मूली प्रमुख हैं। अहोई अष्टमी की पूजा में गन्ना और मूली जरूर रखी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इस दिन इन दोनों चीजों की पूजा क्यों की जाती है? आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और महत्व।
अहोई अष्टमी पर गन्ने की पूजा क्यों होती है?
अहोई अष्टमी की पूजा में गन्ना रखना बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गन्ना मिठास, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है। जिस तरह गन्ने में प्राकृतिक मिठास होती है, उसी तरह माताएं कामना करती हैं कि उनकी संतान का जीवन भी हमेशा खुशियों और प्रेम से भरा रहे। माना जाता है कि अहोई माता को गन्ना अर्पित करने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
अहोई अष्टमी के दिन मूली की पूजा क्यों होती है ?
अहोई अष्टमी पर गन्ने के साथ मूली भी पूजा में रखी जाती है। मूली को शुद्धता, स्वास्थ्य और अच्छी सेहत का प्रतीक माना जाता है। यह व्रत भी माताएं संतान के अच्छे स्वस्थ और जीवन में खुशहाली के लिए करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा में मूली अर्पित करने से संतान की अच्छी सेहत और लंबी उम्र की कामना पूरी होती है। यही कारण है कि अहोई अष्टमी के पूजन में मूली को भी शामिल किया जाता है।
अहोई अष्टमी पर इन चीजों को चढ़ाने से मिलता है शुभ फल
अहोई अष्टमी का व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मां और संतान के बीच प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी है। इस दिन माता अहोई को प्रसन्न करने के लिए आप गन्ना और मूली के अलावा देवी को दूध और चावल खीर चढ़ा सकती हैं। इसके अलावा आप गुलगुले और मीठे पुए बनाकर देवी को चढ़ा सकती हैं। माता अहोई को हलवा पूरी का प्रसाद भी बहुत पसंद है। फलों में सिंघाड़ा देवी जी का बहुत ही प्रिय है। इसके साथ ही आप देवी को 7 प्रकार के अनाज जैसे गेहूं, चावल, मूंग, मसूर, जौ, चना और तिल आदि भी चढ़ा सकते हैं।
यह भी पढ़ें- संतान की तरक्की के सारे बंद दरवाजे खोल देगा यह व्रत, बस जान लें अहोई माता की पूजा का सही नियम
यह भी पढ़ें- स्याहु माला के बिना अधूरा माना जाता है अहोई अष्टमी का व्रत! क्या है इसे धारण करने की सही विधि?
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।