3 साल बाद मिला है ये खास मौका! अधिक पूर्णिमा पर आपकी कुछ गलतियां कर सकती हैं बड़ा नुकसान
अधिक पूर्णिमा 2026, जो 31 मई को मनाई जाएगी, अधिक मास का एक दुर्लभ और पवित्र संयोग है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

अधिक पूर्णिमा पर इन गलतियों से बचें (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू कैलेंडर में 3 साल बाद अधिक मास (मलमास) का पावन आगमन हुआ है। इस विशेष महीने में आने वाली अधिक पूर्णिमा एक अत्यंत दुर्लभ और पवित्र तिथि मानी गई है। यह तिथि आपको भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा दिला सकती है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस तिथि पर आपको किन गलतियों से बचना चाहिए।
इन कामों की होती है मनाही
'अधिक मास' (पुरुषोत्तम मास) में किसी भी नए व्यापार की शुरुआत, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई या कोई भी बड़ा शुभ/मांगलिक कार्य शुरू करने की मनाही होती है। अधिक मास का यह समय सांसारिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि, ईश्वर की भक्ति, मंत्र जप और दान-पुण्य के लिए समर्पित माना गया है।
इन गलतियों से बचें
जिस घर में अशांति और अपशब्दों का प्रयोग होता है, वहां कभी भी धन की देवी अर्थात माता लक्ष्मी का वास नहीं होता। ऐसे में अधिक पूर्णिमा के दिन घर में किसी भी प्रकार के वाद-विवाद या झगड़े से बचें। विशेष रूप से महिलाओं, माता-पिता, बुजुर्गों और किसी भी जरूरतमंद का अनादर या अपमान न करें। ऐसा करने से आपको भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है।

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आध्यात्मिक लाभ से रह जाएंगे वंचित
ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा का स्तर सबसे ऊंचा होता है, जिसका लाभ उठाने के लिए सुबह जल्दी उठना चाहिए। सूर्योदय के बाद बहुत देर तक सोए रहने से शरीर में आलस्य बढ़ता है और मानसिक पवित्रता भंग होती है। इसके अलावा पूर्णिमा पर दिन के समय सोने की भी मनाही होती है। देर तक सोने से आप इस दुर्लभ दिन के आध्यात्मिक लाभ से वंचित रह जाते हैं।
भूल से भी न करें ये गलती
अधिक पूर्णिमा का यह महासंयोग जीवन में बार-बार नहीं आता। पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर किए गए दान का फल सामान्य दिनों के मुकाबले हजार गुना अधिक फलदायी होता है यदि इस पावन तिथि पर आपके घर के दरवाजे पर कोई गरीब, भिखारी, असहाय व्यक्ति या साधु-संत आता है, तो उसे कभी भी डांटकर या खाली हाथ न लौटाएं। याचक को खाली हाथ लौटाने से पितरों की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में अपनी सामर्थ्य के अनुसार उन्हें अनाज, धन, फल या जल का दान जरूर करें।

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इन चीजों से बनाएं दूरी
- पूर्णिमा की पवित्र तिथि पर शरीर और मन की शुद्धि होना सबसे जरूरी शर्त है।
- इस दिन पूरी तरह सात्विक जीवन जीने का संकल्प लेना चाहिए।
- भोजन में भूलकर भी लहसुन, प्याज, मांस या मछली जैसी तामसिक चीजों का उपयोग न करें।
- इस दिन शराब या अन्य किसी भी प्रकार के नशे का सेवन न करें।
- पूर्णिमा तिथि पर बाल कटवाना, शेविंग और नाखून काटना आदि कार्य वर्जित माने जाते हैं।
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