क्यों पवित्र है 108 का अंक? जानें माला के मनकों से सूर्य और पृथ्वी के बीच का अद्भुत गणित
माला में 108 मोतियों की संख्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। ज्योतिषीय रूप से, यह 27 नक्षत्रों के ...और पढ़ें

108 मनको का जाप (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और मंत्रों के जाप का विशेष महत्व है। आपने अक्सर देखा होगा कि जब भी कोई व्यक्ति माला से जाप करता है, तो उस माला में हमेशा 108 मोती (मनके) ही होते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि यह संख्या 100 या 110 क्यों नहीं होती? 108 के पीछे छिपे धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारणों को समझना बहुत दिलचस्प है।
108 संख्या का ज्योतिषीय और खगोलीय आधार
हिंदू ज्योतिष (Jyotish) के अनुसार, पूरा ब्रह्मांड नक्षत्रों और राशियों पर आधारित है। 108 की संख्या इसी गणना से निकलती है:
नक्षत्र और चरण: कुल 27 नक्षत्र होते हैं और हर नक्षत्र के 4 चरण होते हैं। जब हम 27 को 4 से गुणा करते हैं, तो संख्या 108 आती है। माला का हर मनका ब्रह्मांड के एक हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
ग्रह और राशियां: ज्योतिष में 12 राशियां और 9 ग्रह माने गए हैं। इन दोनों को गुणा करने पर भी 108 ही होता है। सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी का अद्भुत संबंध-प्राचीन ऋषियों को खगोल विज्ञान की गहरी समझ थी।
वैज्ञानिक दृष्टि से भी 108 का महत्व हैरान करने वाला है
पृथ्वी से सूर्य की दूरी, सूर्य के व्यास (Diameter) का लगभग 108 गुना है।

(Image Source: AI-Generated)
चंद्रमा की दूरी: इसी तरह, पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी भी चंद्रमा के व्यास का लगभग 108 गुना है। यही कारण है कि 108 को ब्रह्मांड की पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। मानव शरीर और सांसों का विज्ञान-अध्यात्म के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति दिन भर में लगभग 21,600 बार सांस लेता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को दिन का आधा समय (10,800 सांसें) ईश्वर के ध्यान में बिताना चाहिए। लेकिन, सामान्य व्यक्ति के लिए यह मुश्किल है, इसलिए अंतिम दो शून्य हटाकर 108 की संख्या निर्धारित की गई, ताकि कम समय में भी पूरे दिन की साधना का फल मिल सके।
अंकों का रहस्य (1, 0 और 8)
1 (एक): परमात्मा या सर्वोच्च सत्य का प्रतीक।
0 (शून्य): पूर्णता और शून्यता का प्रतीक।
8 (आठ): अनंत (Infinity) का प्रतीक।
यह भी पढ़ें- Tulsi Mala Ke Niyam: आप भी पहन रहे हैं तुलसी माला, तो इन बातों का रखें ध्यान, मिलेगा शुभ फल
यह भी पढ़ें- Sphatik Mala Benefits: स्फटिक माला धारण करने का बना रहे हैं मन, तो पहले जान लें ये जरूरी नियम
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
