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शारदीय नवरात्रि की सबसे खास संधि पूजा: 19 अक्टूबर को बन रहा महासंयोग, जानें इसका धार्मिक महत्त्व

Published: Mon, 05 Oct 2026 03:16 PM (IST)

शारदीय नवरात्रि 2026 में संधि पूजा 19 अक्टूबर को होगी, जो महाअष्टमी और महानवमी के मिलन बिंदु पर की जाती ...और पढ़ें

संधि पूजा का महत्व

संधि पूजा का महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में नवरात्रि को अत्यंत शुभ और पवित्र त्योहारों में शामिल किया जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि की भव्य शुरुआत 11 अक्तूबर 2026 से शुरू होकर 20 अक्तूबर 2026 विजयदशमी के मौके पर खत्म होगी।

शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन यानी महाष्टमी सबसे खास दिनों में शामिल है। इस दिन मां दुर्गा के सबसे शांत, सौम्य और पवित्र स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है। इस खास मौके पर कन्या पूजन और संधि पूजा करने का विधान है।

संधि काल की पूजा कब की जाती है? 

संधि पूजा दुर्गा पूजा के दौरान खास समय पर की जाती है, जो आमतौर पर 8वें और 9वें दिन के मिलन बिंदु पर की जाती है, जब आठवां दिन (महाअष्टमी) समाप्त होता है और नौवां दिन (महानवमी) शुरू होता है।

अष्टमी और नौवीं के इसी मिलन बिंदु को, जो आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से बेहद शक्तिशाली समय है, जिसे 'संधिक्षण' के नाम से जाना जाता है। यह सिर्फ 24 मिनट का समय ही नहीं होता है, बल्कि इसमें अष्टमी के आखिरी 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआत के 24 मिनट शामिल होते हैं, जिससे कुल 48 मिनट का समय बनता है।

संधि शब्द का अर्थ है, परिवर्तन का पल जब भक्त मां दुर्गा के उग्र रूप की पूजा करने के लिए खास तरह का अनुष्ठान करते हैं।

संधि पूजा 2026 मुहूर्त

द्रिक पंचांग के हिसाब से शारदीय नवरात्रि के मौके पर संधि पूजा 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को की जाएगी।

अष्टमी तिथि प्रारंभ- 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर
अष्टमी तिथि समाप्त- 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर
संधि पूजा का मुहूर्त- 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को सुबह 10 बजकर 27 मिनट से लेकर 11 बजकर 15 मिनट तक

शारदीय नवरात्रि पर संधि पूजा क्यों हैं जरूरी?

संधि पूजा का धार्मिक महत्व- संधि पूजा के दौरान अष्टमी और नवमी दोनों ही देवियों की पूजा की जाती है। माना जाता है कि, इसी समय मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था।

संधि काल के दौरान 108 दीपक जलाकर माता की पूजा-अर्चना करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा इस समय केला, ककड़ी, कद्दु आदि फल-सब्जी की बलि देने की भी परंपरा निभाई जाती है। साथ ही मां भगवती की आराधना करने से सभी इच्छित फल की पूर्ति होती है।

संधि पूजा 2026 महत्व

संधि पूजा बेहद ही खास और पवित्र अनुष्ठान है। अष्टमी तिथि की समाप्ति और नवमी तिथि के साथ ही संधि पूजा की शुरुआत हो जाती है। नवरात्रि के दौरान संधि काल का यह समय मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और उन्हें प्रसन्न करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

हिंदू शास्त्रों और पुराणों में संधि काल में की गई पूजा, नाम जप और आराधना से मां जल्द ही आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।