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मासिक शिवरात्रि 2026: आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर शिव भक्ति का सुनहरा मौका, नोट करें जलाभिषेक का सही समय

Published: Tue, 06 Oct 2026 05:48 PM (IST)

मासिक शिवरात्रि 8 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी, जो भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, ...और पढ़ें

मासिक शिवरात्रि का महत्व

मासिक शिवरात्रि का महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर महीने भगवान शिव को समर्पित मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस साल अक्टूबर के महीने में मासिक शिवरात्रि 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी।

हिंदू पंचांग के हिसाब से यह खास दिन आश्विन चंद्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ रहा है। भगवान शिव के भक्तों के लिए यह मौका व्रत, शिवलिंग अभिषेक और संध्याकालीन पूजा के लिए बेहद खास माना जाता है।

मासिक शिवरात्रि अक्टूबर 2026 तिथि

विवरण तिथि समय
 मासिक शिवरात्रि  8 अक्टूबर 2026, गुरुवार
 कृष्ण पक्ष चतुर्दशी प्रारंभ  8 अक्तूबर, रात करीब 10 बजकर 15 मिनट पर
 चतुर्दशी समाप्त  9 अक्तूबर रात 9 बजकर 35 मिनट पर
 निशिता काल  रात 11 बजकर 44 मिनट से लेकर 12 बजकर 33 मिनट तक
 दिन  गुरुवार
 चंद्र माह  अश्विन कृष्ण पक्ष

मासिक शिवरात्रि अक्तूबर 2026 पूजा मुहूर्त

निशिता काल यानी मध्यरात्रि के समय शिवरात्रि की पूजा के लिए सबसे खास माना जाता है। 8 अक्तूबर 2026 को दिल्ली में निशिता काल करीब रात 11 बजकर 44 मिनट से लेकर 12 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगा।

यह समय भगवान शिव की पूजा और शिवलिंग अभिषेक के लिए बेहद खास मानी जाती है।

इसके अलावा भगवान शिव की पूजा चार प्रहर में भी की जा सकती है। अलग-अलग स्थानों पर समय में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।

प्रथम प्रहर- शाम 5 बजकर 59 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 04 मिनट तक

द्वितीय प्रहर- रात -09 बजकर 4 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 8 मिनट तक

तृतीय प्रहर- रात 12 बजकर 8 मिनट से लेकर रात 3 बजकर 13 मिनट तक

चौथा प्रहर- 9 अक्तूबर को सुबह 3 बजकर 13 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 18 मिनट तक

भगवान शिव की पूजा चारों प्रहर में करना अनिवार्य नहीं है, जो भी लोग रात भर नहीं जाग सकते हैं, वे निशिता काल में मुख्य पूजा कर सकते हैं।

मासिक शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पड़ती है, जो चंद्रमा के घटते चरण की चौदहवीं तिथि है। यह रात परंपरागत रूप से भगवान शिव की पूजा, अर्चना, ध्यान, उपवास और आध्यात्मिक साधना के लिए जरूरी है।

भगवान शिव को रूपांतरण, वैराग्य और चेतना के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। इसलिए मासिक शिवरात्रि को आंतरिक शांति प्राप्त करने, नकारात्मक विचारों पर जीत हासिल करने और आध्यात्मिक साधना को मजबूत करने के लिए सही माना जाता है।

मासिक शिवरात्रि पर शिवलिंग अभिषेक की विधि

मासिक शिवरात्रि के मौके पर किए जाने वाले सबसे जरूरी अनुष्ठानों में से एक है शिवलिंग पर जल अर्पित यानी जलाभिषेक करना। भक्त भगवान शिव के मंदिर में जाकर जलाभिषेक कर सकते हैं।

व्रत और पूजा शुरू करने से पहले भक्तों को स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए। शिवलिंग को अच्छे से साफ कररें और पूजा की सामग्री व्यवस्थित करें।

इसके बाद व्रत शुरू होने से पहले भगवान शिव के सामने एक सरल संकल्प ले सकते हैं। मन ही मन भक्ति और अनुशासन के साथ मासिक शिवरात्रि व्रत का पालन करने का संकल्प लें।

सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करें। उपलब्ध न होने पर गंगाजल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जल अर्पित करते समय 'ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए।'भक्त पंचामृत से भी अभिषेक कर सकते हैं। पंचामृत अर्पित करने के बाद शिवलिंग का फिर से जलाभिषेक करना चाहिए।

भगवान शिव का जलाभिषेक करने के बाद ताजा बेल पत्र भी अर्पित करें। भक्त आरती, शिव चालीसा का पाठ और मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं।

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