करवा चौथ पर छलनी से ही क्यों देखा जाता है चांद और पति का चेहरा? पढ़ें वीरवती से जुड़ी पौराणिक कथा
इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार के दिन रखा जाएगा। एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी से जानते हैं ...और पढ़ें

करवा चौथ पर छलनी से चांद देखने का फायदा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र और दशहरा खत्म होने के बाद अब विवाहित महिलाएं करवा चौथ (Karwa Chauth 2026) की तैयारियों में लग चुकी हैं। इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
इस व्रत में सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, उज्जवल भविष्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। इस व्रत की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जो अब धीरे-धीरे पूरे भारतवर्ष में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है।
करवा चौथ के व्रत को तोड़ने से पहले महिलाएं करवा माता और चंद्र देव की पूजा करती हैं। इसके बाद छलनी से अपने पति और चांद का दीदार करती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिरकार महिलाएं करवा चौथ के मौके पर पति को छलनी से ही क्यों देखती हैं? एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी से जानते हैं इसके पीछे का सटीक कारण।
पति को छलनी से देखने का महत्व
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, करवा चौथ पर छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखने के पीछे पौराणिक और धार्मिक मान्यताएं हैं, जो समय बीतने के साथ धीरे-धीरे इस त्योहार का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुकी है।
दरअसल छलनी में कई छोटे-छोटे छेद होते हैं और जब इन छिद्रों से चांद का दीदार किया जाता है, तो इससे कई प्रतिबिंब बनते हैं। इसके बाद छलनी से पति का चेहरा देखा जाता है और इस दौरान जितने प्रतिबिंब नजर आते हैं, माना जाता है कि पति की आयु उतनी ही बढ़ जाती है।
छलनी से चांद देखने के मुख्य कारण
वीरवती की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, वीरवती नाम की पतिव्रता स्त्री ने करवा चौथ का व्रत रखा था। भूख-प्यास से बेचैन बहन की हालत देखकर उसके भाइयों ने छलनी के पीछे आग का उजाला रखकर नकली चांद दिखा दिया। वीरवती ने अर्घ्य दे दिया और व्रत तोड़ दिया, जिससे उसके पति की मृत्यु हो गई।
जब उसे सच्चाई का पता चला, तो उसने फिर से नियमपूर्वक व्रत रखा। तभी से छलनी से असली चांद को अच्छी तरह देखकर अर्घ्य देने की परंपरा शुरू हुई।
नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
धार्मिक मान्यता है कि जब पत्नी दिनभर का कठिन व्रत रखकर पति को देखती है, तो उसके मन में अपार प्रेम और भावनाएं होती हैं। छलनी के छिद्रों से देखने पर किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा या नजर का प्रभाव खत्म हो जाता है और प्रेम किसी स्वार्थ के बना रहता है।
मानसिक शांति और विकारों का शमन
चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। छलनी से छनकर आने वाली चंद्रमा की किरणें मानसिक शांति प्रदान करने के साथ मन के विकारों (रोग, दोष, पीड़ा) को दूर करने का प्रतीक हैं।
यह भी पढ़ें- करवा चौथ 2026: पंजाब, यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश में कैसे मनाया जाता है यह पर्व?
यह भी पढ़ें- 17 दिन के लिए शुक्र अस्त होने से नवविवाहितों में कन्फ्यूजन! क्या पहली बार करवा चौथ का व्रत रखना होगा अशुभ?
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
