होलाष्टक 2026: भक्त प्रह्लाद जैसा सुरक्षा कवच चाहिए? होलाष्टक के इन 8 दिनों में ऐसे करें विष्णु जी की पूजा
साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू हो चुका है। जानें इन 8 दिनों में भगवान विष्णु और तुलसी ...और पढ़ें
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होलाष्टक में करें विष्णु जी की पूजा (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। होलाष्टक का समय हिंदू धर्म में बहुत ही विशेष और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। होली से ठीक आठ दिन पहले शुरू होने वाले इस समय को 'होलाष्टक' (Holashtak) कहा जाता है। साल 2026 में होलाष्टक की शुरुआत कब हो रही है और इन दिनों में भगवान विष्णु व तुलसी की पूजा का क्या महत्व है।
होलाष्टक 2026: क्या है यह समय?
होली के आठ दिन पहले, यानी फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक शुरू हो जाता है। जो पूर्णिमा (होलिका दहन) तक चलता है। धार्मिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू हुआ है और 3 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा।
मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों में ग्रहों का स्वभाव काफी उग्र रहता है, इसलिए इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य (जैसे विवाह या मुंडन) नहीं किया जाता।
भगवान विष्णु की पूजा का विधान
होलाष्टक के दौरान भगवान विष्णु की भक्ति का विशेष फल मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इन्हीं आठ दिनों में भक्त प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने सबसे ज्यादा प्रताड़ित किया था, लेकिन विष्णु जी की कृपा से उनका बाल भी बांका नहीं हुआ।

(Image Source: AI-Generated)
विधि: रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद भगवान विष्णु के 'नारायण' रूप की पूजा करें।
मंत्र: इन दिनों में "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करना मानसिक शांति और सुरक्षा प्रदान करता है।
अभिषेक: अगर संभव हो, तो विष्णु जी की मूर्ति का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें। इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है।
सुख-समृद्धि का द्वार है तुलसी पूजा
होलाष्टक में तुलसी की पूजा (Tulsi Puja) को बहुत फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इन आठ दिनों में तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाने से घर में लक्ष्मी का वास होता है। सुबह तुलसी को जल अर्पित करें और शाम को उसकी आरती करें। तुलसी की सेवा करने से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
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