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Hanuman Chalisa: 'राम दूत अतुलित बल धामा...' जीवन की हर परेशानी दूर करेगी यह चमत्कारी चौपाई, समझिए इसका अर्थ

Published: Sat, 03 Oct 2026 09:22 AM (IST)

हनुमान चालीसा की एक विशेष चौपाई, 'राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।' का पाठ करने से जीवन के ...और पढ़ें

हनुमान चालीसा की दूसरी चौपाई का हिंदी अर्थ क्या है (Picture Credit: AI Generated)

हनुमान चालीसा की दूसरी चौपाई का हिंदी अर्थ क्या है (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसका विधिपूर्वक पाठ करने से साधक को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में आने वाले सभी संकट दूर होते हैं। इसके अलावा हनुमान जी की कृपा से सुख-शांति में वृद्धि होती है।

हनुमान चालीसा की एक ऐसी चौपाई है, जिसमें बजरंगबली के स्वरूप, बल और उनकी पहचान का सुंदर वर्णन किया गया है। यह जानकर आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि वह कौन सी चौपाई है, जिसमें हनुमान जी के स्वरूप का वर्णन देखने को मिलता है। आइए इस आर्टिकल में आपको इस प्रसिद्ध चौपाई के बारे में बताते हैं।

हनुमान चालीसा की दूसरी चौपाई

राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

हिंदी अर्थ

हनुमान चालीसा की इस चौपाई का अर्थ है कि हे हनुमान जी! आप भगवान श्री राम के परम दूत हैं और आप असीम बल के भंडार हैं। आप माता अंजनी के पुत्र हैं और आपको पवनसुत के नाम से भी जाना जाता है।

शब्दों के अर्थ

राम दूत- भगवान श्री राम के दूत।
अतुलित- जिसकी किसी से तुलना न की जा सके।
बल- शक्ति या ताकत।
धामा- भंडार या निवास स्थान।
अंजनि-पुत्र - माता अंजनी के पुत्र।
पवनसुत- पवन (वायु) देव के पुत्र।
नामा- नाम से जाने जाते हैं या प्रसिद्ध हैं।

पाठ का लाभ

धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान चालीसा की इस चौपाई का पाठ करने से व्यक्ति की शारीरिक कमजोरी दूर होती है और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा हनुमान जी की कृपा से जीवन में शुभ परिणाम मिलते हैं और सभी तरह की परेशानियां दूर होती हैं। बिगड़े काम भी पूरे होते हैं।

पाठ के दौरान न करें ये गलतियां

  • हनुमान चालीसा का पाठ करने से पहले स्नान कर साफ कपड़े धारण करें।
  • पाठ करने वाले व्यक्ति को मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • पाठ करते समय सीधे जमीन पर न बैठें। हमेशा लाल या पीले रंग के ऊनी या कुशा के आसन का प्रयोग करें।
  • पाठ के दौरान किसी से वाद-विवाद न करें। साथ ही किसी के बारे में गलत न सोचें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।