
- भगवान हनुमान को बजरंगबली, पवनपुत्र, अंजनी पुत्र, केसरीनंदन, महावीर, संकटमोचन और मारुति नंदन के नाम से भी जाना जाता है।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी भगवान शिव के रुद्रावतार माने जाते हैं। उनके पिता का नाम केसरी और माता का नाम अंजनी है।
- हनुमान जी को भगवान श्रीराम का परम भक्त और दूत माना जाता है। रामायण में उन्होंने माता सीता की खोज और लंका दहन सहित भगवान राम के कई महत्वपूर्ण कार्यों में सहायता की थी।
- हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष माने जाते हैं। भक्त इन दिनों हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करते हैं।
- हनुमान जी को लाल रंग प्रिय माना जाता है। उनकी पूजा में सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, गुड़ और चने का भोग प्रमुख रूप से चढ़ाया जाता है।
- हनुमान जी के प्रमुख स्वरूपों में बाल हनुमान, पंचमुखी हनुमान, वीर हनुमान, संकटमोचन हनुमान और रामभक्त हनुमान शामिल हैं।
- हनुमान जी से जुड़े प्रमुख त्योहारों में हनुमान जन्मोत्सव (हनुमान जयंती) और बड़ा मंगलवार प्रमुख हैं।
- हनुमान जी के प्रसिद्ध मंदिरों में श्री हनुमान मंदिर, जाखू हनुमान मंदिर, लेटे हनुमान मंदिर, मेहंदीपुर बालाजी और सालासर बालाजी शामिल हैं।

श्री हनुमान चालीसा
।। दोहा ।।
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
अर्थ: अपने गुरुदेव के चरणों की पावन धूल से अपने मन को साफ करके, मैं भगवान श्रीराम का गुणगान करता हूं, जो जीवन धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्रदान करने वाला है।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥
अर्थ: हे पवनपुत्र हनुमान जी! मैं खुद को ज्ञानहीन मानकर आपका ध्यान करता हूं। आप मुझे शारीरिक बल, अच्छी बुद्धि और सच्चा ज्ञान दीजिए और मेरे सभी कष्टों, दुखों और मानसिक विकारों को दूर कर दीजिए।
॥ चौपाई ॥
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर ।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर ॥
अर्थ: हे हनुमान जी! आपकी जय हो, आप ज्ञान और गुणों के असीम सागर हैं। हे वानरश्रेष्ठ! आपकी कीर्ति तीनों लोकों (आकाश, पृथ्वी और पाताल) में फैली हुई है।
राम दूत अतुलित बलधामा ।
अंजनी पुत्र पवन सुत नामा ॥
अर्थ: आप भगवान राम के सर्वप्रिय दूत हैं और अतुलनीय शक्ति के धाम हैं। आपको माता अंजनी के पुत्र और पवनपुत्र के नाम से जाना जाता है।
महावीर विक्रम बजरंगी ।
कुमति निवार सुमति के संगी ॥
अर्थ: हे परम पराक्रमी बजरंगबली! आप अत्यंत साहसी हैं। आप हमारे मन से कुविचारों (गलत सोच) को दूर करते हैं और सद्बुद्धि देने वाले के सच्चे साथी हैं।
कंचन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुण्डल कुंचित केसा ॥
अर्थ: आपका शरीर सोने के समान चमकदार है और आप सुंदर वस्त्र पहने हुए हैं। आपके कानों में कुंडल हैं और बाल घुंघराले हैं।
हाथ बज्र और ध्वजा विराजे ।
कांधे मूंज जनेऊ साजै ॥
अर्थ: आप अपने एक हाथ में दिव्य वज्र और दूसरे में धर्म की ध्वजा लिए हुए है। आपने कंधे पर पवित्र मूंज का जनेऊ धारण किया हुआ है।
शंकर सुवन केसरी नंदन ।
तेज प्रताप महा जग वंदन ॥
अर्थ: आप भगवान शिव के अवतार और राजा केसरी के पुत्र हैं। आपके महान पराक्रम और तेज की पूजा सारा संसार करता है।
विद्यावान गुणी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥
अर्थ: आप सभी तरह की विद्याओं में निपुण, गुणवान और बेहद चतुर हैं। आप श्रीराम के सभी कामों को पूरा करने के लिए आप हमेशा तैयार रहते हैं।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥
अर्थ: आपको श्रीराम की कथाएं सुनना बेहद पसंद है। आपके दिल में हमेशा प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी वास करते हैं।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥
अर्थ: आपने बहुत छोटा रूप धारण कर माता सीता को अपने दर्शन दिए, और विशाल-भयंकर रूप बनाकर रावण की लंका को जलाकर भस्म कर दिया।
भीम रूप धरि असुर संहारे ।
रामचन्द्र के काज संवारे ॥
अर्थ: आपने अपने विशाल रूप से दुष्ट राक्षसों का वध किया और प्रभु श्रीराम के सभी कार्यों को सफलतापूर्वक सिद्ध किया।
लाय सजीवन लखन जियाये ।
श्री रघुवीर हरषि उर लाये ॥
अर्थ: आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी की जान बचाई, जिससे बेहद खुश होकर श्रीराम ने आपको प्रेम से गले लगाया था।
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरत सम भाई ॥
अर्थ: भगवान श्रीराम ने आपकी प्रशंसा की और आपको अपने भाई भरत के ही समान ही अति प्रिय बताया।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥
अर्थ: "आपका यश सहस्रों (हजारों) मुखों से गाने योग्य है"- यह कहकर श्रीराम ने आपको पुनः हृदय से लगा लिया।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद, सारद सहित अहीसा ॥
अर्थ: सनकादि ऋषि, ब्रह्मा जी जैसे देवता, नारद जी, माता सरस्वती और शेषनाग जी- सभी आपके गुणों का निरंतर गान करते हैं।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते ॥
अर्थ: यमराज, कुबेर और दसों दिशाओं के रक्षक, यहां तक कि बड़े-बड़े कवि और विद्वान भी आपके अपार यश का पूर्ण वर्णन करने में असमर्थ हैं।
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा ।
राम मिलाय राजपद दीन्हा ॥
अर्थ: आपने सुग्रीव को श्रीराम से मिलाकर उन पर महान उपकार किया, जिसके फलस्वरूप उन्हें किष्किंधा का राज्य प्राप्त हुआ।
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना ।
लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥
अर्थ: आपकी सही सलाह को विभीषण ने स्वीकार किया, जिसके कारण वे लंका के राजा बने- यह बात पूरा संसार जानता है।
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥
अर्थ: जो सूर्य यहां से हजारों योजन की अथाह दूरी पर स्थित है, उसे आपने बालपन में एक मीठा फल समझकर पलक झपकते ही निगल लिया था।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि ।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ॥
अर्थ: श्रीराम की नाम-अंगूठी को अपने मुख में रखकर आपने विशाल समुद्र को लांघ लिया, आपकी असीम शक्ति को देखते हुए इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।
दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥
अर्थ: इस संसार में जितने भी कठिन से कठिन कार्य हैं, आपकी कृपा से वे बेहद सरल और आसान हो जाते हैं।
राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसा रे ॥
अर्थ: आप भगवान राम के द्वार के रक्षक हैं। आपकी अनुमति के बिना कोई भी श्रीराम के चरणों तक नहीं पहुंच सकता। आपकी प्रसन्नता से ही राम-कृपा मिलती है।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।
तुम रक्षक काहू को डरना ॥
अर्थ: आपकी शरण में आने वाले को सभी प्रकार के सुख और आनंद प्राप्त होते हैं। जब आप स्वयं रक्षक हों, तो फिर किसी बात का भय नहीं रहता।
आपन तेज सम्हारो आपै ।
तीनों लोक हांक तें कांपै ॥
अर्थ: अपने अपार तेज को केवल आप ही संभाल सकते हैं। आपकी एक ही हुंकार से तीनों लोक थर-थर कांपने लगते हैं।
भूत पिशाच निकट नहिं आवै ।
महावीर जब नाम सुनावै ॥
अर्थ: जब-जब महाबली हनुमान जी का नाम लिया जाता है, तब-तब भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियां आसपास भी नहीं भटक सकतीं।
नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥
अर्थ: वीर हनुमान जी का निरंतर नाम जपने और ध्यान करने से समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं और सभी शारीरिक व मानसिक कष्ट मिट जाते हैं।
संकट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥
अर्थ: जो व्यक्ति अपने मन, कर्म और विचारों से हनुमान जी का स्मरण करता है, उन्हें हनुमान जी हर संकट से बाहर निकाल लेते हैं।
सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिनके काज सकल तुम साजा ॥
अर्थ: परम तपस्वी राजा श्रीराम सबसे श्रेष्ठ हैं, और उनके भी सभी कठिन कार्यों को आपने ही सहजता से पूर्ण किया।
और मनोरथ जो कोइ लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥
अर्थ: आपके पास जो भी अपनी मनोकामना लेकर आता है, उसे ऐसा असीम और अक्षय फल प्राप्त होता है जिसकी कोई सीमा नहीं है।
चारों जुग परताप तुम्हारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥
अर्थ: सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलि- चारों युगों में आपकी महिमा व्याप्त है। आपकी कीर्ति से पूरा संसार प्रकाशित हो रहा है।
साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकंदन राम दुलारे ॥
अर्थ: हे श्रीराम के प्रिय! आप संतों, ऋषियों और सज्जनों की रक्षा करते हैं तथा दुष्टों व राक्षसों का संहार करते हैं।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥
अर्थ: माता सीता ने आपको ऐसा वरदान दिया है, जिससे आप भक्तों को आठों सिद्धियां और नौ निधियां प्रदान कर सकते हैं।
राम रसायन तुम्हरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥
अर्थ: आपके पास राम-नाम रूपी ऐसी दिव्य औषधि है, जिसके प्रभाव से आप सदा श्रीराम के अनन्य भक्त बने रहते हैं और भक्तों के दुख हरते हैं।
तुम्हरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥
अर्थ: आपकी भक्ति करने से श्रीराम की प्राप्ति होती है और मनुष्य अपने जन्मों-जन्मांडों के दुखों से मुक्ति पा जाता है।
अन्त काल रघुबर पुर जाई ।
जहां जन्म हरि भक्त कहाई ॥
अर्थ: ऐसा भक्त मृत्यु के पश्चात प्रभु श्रीराम के परमधाम को जाता है, और यदि पृथ्वी पर पुनर्जन्म भी ले, तो हरि-भक्त के रूप में ही जाना जाता है।
और देवता चित न धरई ।
हनुमत सेई सर्व सुख करई ॥
अर्थ: केवल हनुमान जी की सेवा-भक्ति करने से ही जीवन के समस्त सुख प्राप्त हो जाते हैं, इसके बाद किसी अन्य देवता की विशेष उपासना की आवश्यकता नहीं रहती।
संकट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥
अर्थ: जो भी व्यक्ति महाबली हनुमान जी का स्मरण करता रहता है, उसके जीवन के सारे संकट और सारी वेदनाएं समाप्त हो जाती हैं।
जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरु देव की नाई ॥
अर्थ: हे प्रभु हनुमान जी! आपकी सदा जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझ पर एक कृपालु गुरुदेव की तरह अपनी कृपा बनाए रखें।
जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बंदि महा सुख होई ॥
अर्थ: जो व्यक्ति इस चालीसा का सौ बार (नियमित) पाठ करता है, वह संसार के सभी बंधनों से मुक्त हो जाता है और उसे परम आनंद की प्राप्ति होती है।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥
अर्थ: जो भी इस हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करेगा, उसे निश्चित ही सफलता प्राप्त होगी- इस बात के साक्षी स्वयं भगवान शिव (गौरीश) हैं।
तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा ॥
अर्थ: संत तुलसीदास जी कहते हैं कि वे सदा श्रीराम के सेवक हैं। हे हनुमान जी! आप सदा के लिए उनके हृदय में निवास कीजिए।
॥ दोहा ॥
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सूरभूप ॥
अर्थ: हे संकटों को हरने वाले पवनपुत्र! आप कल्याण और मंगल के साक्षात स्वरूप हैं। हे देवशिरोमणि! आप भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ सदैव मेरे हृदय मंदिर में निवास कीजिए।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- हनुमान चालीसा का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना बेहद लाभकारी माना जाता है। इससे न सिर्फ मानसिक शांति मिलती है, बल्कि बेवजह का भय और तनाव दूर होता है। साथ ही आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होती है।
- हनुमान चालीसा का पाठ कब और कितनी बार करना चाहिए?हनुमान चालीसा का पाठ रोजाना किया जा सकता है। खासकर मंगलवार और शनिवार के दिन इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। इसके लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्यास्त का समय सबसे शुभ माना जाता है। हालांकि, इसे श्रद्धा अनुसार किसी भी समय पढ़ा जा सकता है।
- हनुमान चालीसा किसने लिखी है?हनुमान चालीसा की रचना मूलरूप से गोस्वामी तुलसीदास ने की थी।
- मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने का क्या महत्व है?ऐसा माना जाता है कि मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना काफी फायदेमंद होता है। इससे जीवन में आ रही सभी तरह की बाधाएं, ग्रह दोष और भय दूर हो जाते हैं।
- हनुमान चालीसा और बजरंग बाण में क्या अंतर है?हनुमान चालीसा और बजरंग बाण दोनों ही पवनपुत्र हनुमान को समर्पित पाठ हैं, लेकिन इनमें प्रमुख अंतर उद्देश्य, रचना और प्रयोग का है। हनुमान चालीसा बजरंगबली की स्तुति है, तो वहीं बजरंग बाण एक मंत्र-स्तोत्र है।
- हनुमान चालीसा में भगवान हनुमान के किन-किन स्वरूपों और गुणों का वर्णन किया गया है?हनुमान चालीसा हनुमान जी को समर्पित एक शक्तिशाली पाठ है, जिसमें उनके अलौकिक स्वरूप, दिव्य गुणों और उनके महान चरित्र का बेहद सुंदर तरीके से विस्तार से वर्णन किया गया है।
- हनुमान चालीसा में कितनी चौपाइयां हैं?हनुमान चालीसा में कुल 40 चौपाइयां और दो दोहे हैं।
- हनुमान चालीसा का 7 बार पाठ करने से क्या होता है?रोजाना नियमित रूप से 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से कई सारे फायदे मिलते हैं। इससे मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
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