नई दिल्ली, Ganesh Jayanti 2023: हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जयंती का व्रत रखा जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, गणेश जयंती के दिन माता पार्वती और भगवान शिव के छोटे पुत्र यानी गणेश जी का जन्म हुआ था। इसी के कारण इसे गणेश जयंती के रूप में मनाते हैं। गणेश जयंती को माघी गणेशोत्सव, माघ विनायक चतुर्थी, वरद चतुर्थी और वरद तिल कुंद चतुर्थी भी कहा जाता है। माघ में पड़ने वाली गणेश चतुर्थी काफी खास है क्योंकि इस दिन बुधवार भी पड़ रहा है, जो श्री गणेश को ही समर्पित है। इसके साथ इस दिन रवि, शिव जैसे योग बन रहे हैं। जानिए गणेश जयंती का शुभ मुहूर्त, योग और पूजा विधि।

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गणेश जयंती 2023 तिथि (Ganesh Jayanti 2023 Tuthi)

माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि आरंभ- 24 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 22 मिनट से

चतुर्थी तिथि समाप्त- 25 जनवरी, बुधवार को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक

उदया तिथि के अनुसार गणेश जयंती 25 जनवरी, बुधवार को है।

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गणेश जयंती 2023 शुभ मुहूर्त (Ganesh Jayanti 2023 Shubh Muhurat)

पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 29 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक

रवि योग- सुबह 06 बजकर 44 मिनट से 08 बजकर 05 मिनट तक

परिघ योग- 24 जनवरी को रात 9 बजकर 36 मिनट से 25 जनवरी शाम 6 बजकर 15 मिनट तक

शिव योग- 25 जनवरी शाम 6 बजकर 15 मिनट से 26 जनवरी सुबह 10 बजकर 28 मिनट तक।

गणेश जयंती 2023 चंद्रोदय का समय

25 जनवरी को सुबह 09 बजकर 54 मिनट से रात 09 बजकर 55 मिनट तक चंद्रमा का दर्शन न करें।

भद्रा और पंचक का समय

गणेश जयंती पर भद्रा 25 जनवरी को सुबह 01 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 34 तक है। इसके साथ ही पंचक 27 जनवरी को रहेगा। भद्रा में मांगलिक कार्य करने की मनाही है। लेकिन पंचक और भद्रा में पूजा पाठ किया जा सकता है।

गणेश जयंती पूजा विधि (Ganesh Jayanti 2023 Puja Vidhi)

गणेश जयंती के दिन सूर्योदय से पहले उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान आदि कर लें। इसके बाद साफ सुथरे वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा आरंभ करें। एक लकड़ी की चौकी में लाल या पीला रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति स्थापित कर लें। इसके बाद जल से आचमन करने के बाद गणपति जी को फूल, माला, सिंदूर, हल्दी, गीला अक्षत आदि अर्पित कर दें। इसके बाद भगवान को बूंदी के लड्डू, मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाएं। फिर घी का दीपक और धूप जलाकर विधिवत पूजा के साथ मंत्र, चालीसा, स्तोत्र आदि का पाठ कर लें। अंत में परिवार के साथ मिलकर आरती कर लें और भूल चूक के लिए माफी मांग लें।

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Edited By: Shivani Singh

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