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अक्टूबर के पहले गुरु प्रदोष पर बन रहा खास योग, शाम की पूजा का सटीक समय और महत्व नोट करें

Published: Tue, 06 Oct 2026 06:38 PM (GMT+05:30)

गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक विशेष व्रत है, जो त्रयोदशी तिथि के गुरुवार को पड़ने पर मनाया ...और पढ़ें

गुरुवार त्रयोदशी को भगवान शिव की पूजा (Picture Credits- AI Images)

गुरुवार त्रयोदशी को भगवान शिव की पूजा (Picture Credits- AI Images)

HighLights

  1. गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है।

  2. अक्टूबर 2026 में यह व्रत 8 तारीख को मनाया जाएगा।

  3. शाम के प्रदोष काल में शिवजी की विशेष पूजा की जाती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक खास प्रदोष व्रत जो त्रयोदशी तिथि के गुरुवार को पड़ने पर मनाया जाता है। प्रत्येक चंद्र माह में दो बार शुक्ल और कृष्ण पक्ष में इसका व्रत किया जात है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान शिव की पूजा शाम के समय की जाती है, जब त्रयोदशी प्रदोष काल के साथ पड़ती है।

जब प्रदोष का दिन गुरुवार को पड़ता है, तो इसे खासतौर पर 'गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष' के नाम से जाना जाता है। यह दिन भगवान शिव की प्रार्थनाओं के साथ-साथ देवगुरु बृहस्पति की महिमा के लिए भी बेहद खास माना जाता है।

अक्टूबर 2026 में प्रदोष व्रत कब?

अक्तूबर 2026 महीने का पहला गुरु प्रदोष व्रत 8 तारीख को रखा जाएगा।

गुरु कृष्ण प्रदोष व्रत - बृहस्पतिवार, 8 अक्टूबर 2026 को
प्रदोष पूजा मुहूर्त - शाम 05 बजकर 59 मिनट से रात 8 बजकर 27 मिनट तक
अवधि - 02 घण्टे 28 मिनट्स

दिन का प्रदोष समय - शाम 05 बजकर 59 मिनट से रात 08 बजकर 27 मिनट तक
त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ - 7 अक्टूबर 2026 को रात 11 बजकर 16 मिनट पर
त्रयोदशी तिथि समाप्त - 8 अक्टूबर 2026 को रात 10 बजकर 15 मिनट पर

गुरु प्रदोष व्रत की विशेषता

प्रदोष व्रत सिर्फ कैलेंडर पर ही निर्भर नहीं करता है, बल्कि त्रयोदशी तिथि पर निर्भर करता है। इस व्रत को करने का सबसे खास समय प्रदोष काल है, जो सूर्यास्त के बाद शुरू होता है।

यदि त्रयोदशी प्रदोष काल में गुरुवार के दिन पड़ती है, तो इसे 'गुरु प्रदोष व्रत' के नाम से जाना जाता है। इस समय व्रत का एक खास धार्मिक महत्व होता है। भक्त शाम को भगवान शिव की पूजा करते हैं। वे गुरु बृहस्पति की भी प्रार्थना करते हैं।

गुरु प्रदोष व्रत का महादेव से संबंध

प्रदोष व्रत के मुख्य देवता भगवान शिव हैं। भक्त दिन के समय उपवास रखते हैं, जबकि प्रदोष काल के दौरान शिव जी की पूजा की जाती है। पूजा में भगवान शिव को अर्पित की जाने वाली कोई भी वस्तु जैसे जल, दूध, बिल्व पत्र, फूल आदि शामिल हो सकते हैं। शिव मंत्रों का जाप और भगवान शिव से जुड़ी कथाएं सुनना भी शुभ माना जाता है।

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