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भाद्रपद पूर्णिमा 2026 की रात करें ये 3 काम, दूर होगी हर नकारात्मकता और चमकेगा भाग्य!

Published: Fri, 25 Sep 2026 11:15 AM (IST)

भाद्रपद पूर्णिमा (Bhadrapada Purnima) 26 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान ...और पढ़ें

भाद्रपद पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

भाद्रपद पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भाद्रपद का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ चंद्रमा को अर्घ्य देने की भी परंपरा है। इस साल भाद्रपद पूर्णिमा 2026, शनिवार को पड़ रही है।

25 सितंबर 2026, शुक्रवार को रात 11 बजकर 06 मिनट पर पूर्णिमा की तिथि शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन 26 सितंबर को रात 10 बजकर 18 मिनट पर खत्म होगी।

भाद्रपद पूर्णिमा (Bhadrapada Purnima 2026) के मौके पर पूजा, प्रार्थना करना, दान देना और आध्यात्मिक साधना की जाती है। इस दौरान भक्त भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ उनसे परिवार के लिए सुख-शांति और समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगते हैं। इसके अलावा, चूंकि यह दिन भगवान चंद्र से संबंधित पूर्णिमा से जुड़ा है, इसलिए शाम होने के बाद भक्त चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं।

हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, भाद्रपद पूर्णिमा के मौके पर व्यक्ति को भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करने के साथ तीन धार्मिक कार्य जरूर करने चाहिए, जो उनके जीवन से नकारात्मकता को दूर करने में सिद्ध साबित हो सकती है।

भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व

माना जाता है कि, भाद्रपद पूर्णिमा के मौके पर चंद्रमा के दर्शन करने से जीवन में नकारात्मकता से छुटकारा मिलने के साथ भगवत कृपा भी प्राप्त होती है। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन का चांद पूरे साल का सबसे महत्वपूर्ण चांद माना जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में भी इस बात का उल्लेख देखने को मिलता है कि, ये वही पूर्णिमा का चांद है, जो प्राचीन काल में महाराज परीक्षित ने देखा था।

उन्हें श्राप मिला था कि, भाद्र पूर्णिमा से आगे आने वाले 60 दिनों में उनकी मृत्यु हो जाएगी। श्राप से बचने के लिए महाराज परीक्षित ने इसी दिन पर श्रीमद भागवतम का आश्रय लिया। कहा जाता है कि, भाद्रपद पूर्णिमा के मौके पर तीन कार्य करने से भगवान विष्णु क मन और मस्तिष्क से व्यक्ति पॉजिटिव होने के साथ भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करता है।

bhadrapada purnima 2026 significance of chandra darshan daan and satyanarayan katha

भाद्रपद पूर्णिमा पर चंद्र दर्शन करें

पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति को नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि, इस मौके पर जब चंद्रमा अपने चरम प्रकाश पर होता है, तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव काफी बढ़ जाता है। इसलिए पूर्णिमा की रात को चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।

चंद्र दर्शन के बाद साफ पानी, दूध और फूल से चंद्रदेव का स्मरण करें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए परिवार की सुख, शांति और मंगल की कामना करें। इसके अलावा पूर्णिमा की चांदनी रात को कुछ पल चंद्रमा की रोशनी में भगवान का नाम जप करें।

भाद्रपद पूर्णिमा पर दान का महत्व

सनातन धर्म में दान को अत्यंत महत्वपूर्ण कर्म में शामिल किया गया है। शास्त्रों में दान का मूल्य राशि से नहीं, बल्कि उसे पीछे छिपी हुई भावना से तय किया जाता है। इसलिए पूर्णिमा के मौके पर जरूरतमंद लोगों को भोजन का दान जरूर करें।

भाद्रपद पूर्णिमा पर अपनी श्रद्धा से जितना हो सके उतना अन्न दान जरूर करें। माना जाता है कि, ऐसा करने से आपको कभी जीवन में कभी भी अन्न की कमी नहीं होती है।

भाद्रपद पूर्णिमा पर सत्यनारायण की कथा का महत्व

हिंदू धर्म में सत्यनारायण की पूजा भगवान विष्णु की सत्य के अवतार के रूप में की जाने वाली पूजा है। वैसे तो सत्यनारायण की पूजा व्यक्ति किसी भी दिन कर सकता है, लेकिन पूर्णिमा के मौके पर इसका महत्व काफी बढ़ जाता है।

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, विष्णु जी को भाद्रपद का महीना अत्यंत प्रिय होता है और इस महीने में आने वाली पूर्णिमा पर सत्यनारायण की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहने के साथ जीवन में सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।