भाद्रपद पूर्णिमा 2026 पर क्या दान करें? सुख-शांति और पितरों का आशीर्वाद पाने के सरल उपाय
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। जानिए इस दिन अन्न, वस्त्र और किन खास चीजों का दान ...और पढ़ें
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भाद्रपद पूर्णिमा पर करें इन चीजों का दान? (AI-generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिन्दू पंचांग में वैसे तो हर पूर्णिमा का अपना एक अलग महत्व है, लेकिन भाद्रपद (भादो) महीने की पूर्णिमा कुछ ज्यादा ही खास मानी जाती है। दरअसल, इसी दिन से हमारे पूर्वजों को समर्पित 'पितृ पक्ष' (श्राद्ध) की शुरुआत होती है। सदियों से हमारे घरों में यह मान्यता चली आ रही है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और दान करने से जीवन के कई कष्ट अपने आप दूर हो जाते हैं।
लेकिन, अक्सर हम इस उलझन में रहते हैं कि आखिर इस दिन ऐसा क्या दान किया जाए, जिससे पितरों को शांति मिले और घर-परिवार में बरकत बनी रहे? आइए इस आर्टिकल में हम यही जानेंगे कि क्या दान करें और इसका महत्व क्या है।
1. अन्न का दान (सबसे बड़ा पुण्य)
हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते आए हैं कि भूखे को भोजन कराने से बड़ा कोई धर्म नहीं है। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन चावल, गेहूं, दाल, नमक और आटे का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। आप चाहें तो किसी ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को 'सीधा' (कच्चा राशन) भी दे सकते हैं। मान्यता है कि इससे घर की रसोई में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
2. कपड़े और जूते-चप्पल का दान
किसी गरीब या जरूरतमंद को कपड़े दान करना इस दिन बहुत फलदायी होता है। कोशिश करें कि कपड़े नए हों, फटे-पुराने न हों। इसके अलावा, जूते या चप्पल का दान करने से राहु-केतु और शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और पितृ भी प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।
3. काले तिल और शुद्ध घी
चूंकि, यह पूर्णिमा पितरों के आगमन का द्वार है, इसलिए काले तिल का दान करना बेहद असरदार माना गया है। पितृ दोष से मुक्ति पाने और जीवन की उलझनों को सुलझाने के लिए आप काले तिल, गाय का शुद्ध घी और गुड़ का दान जरूर करें।
4. छाता और जरूरत के बर्तन
पुराने ग्रंथों में बताया गया है कि छाते का दान करने से जीवन पर छाए संकटों के बादल छंट जाते हैं। इसके साथ ही, आप अपनी श्रद्धा के अनुसार तांबे, कांसे या पीतल के बर्तन भी दान कर सकते हैं।
दान हमेशा अपनी खुशी और जेब के हिसाब से करें। दिखावे या किसी के दबाव में आकर किया गया दान कभी फलता नहीं है। सुबह स्नान के बाद सच्चे मन से जो भी दिया जाए, भगवान उसे स्वीकार करते हैं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
