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क्यों खास है हरिद्वार का नीलेश्वर महादेव मंदिर? जानिए समुद्र मंथन और नीलधारा से जुड़ी पौराणिक कथा

Published: Tue, 25 Aug 2026 07:00 AM (IST)

हरिद्वार का नीलेश्वर महादेव मंदिर नील पर्वत पर स्थित है, जो सावन में विशेष महत्व रखता है। यह मंदिर समुद्र ...और पढ़ें

नीलेश्वर महादेव मंदिर का रहस्य

नीलेश्वर महादेव मंदिर का रहस्य

HighLights

  1. नीलेश्वर महादेव मंदिर हरिद्वार के नील पर्वत पर स्थित है।

  2. समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष से जुड़ा है मंदिर।

  3. माता सती और दक्ष प्रजापति की कथा भी संबंधित है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का पवित्र महीना महादेव की पूजा-अर्चना के लिए अधिक शुभ माना जाता है। इस माह में शिव मंदिरों में एक खास रौनक देखने को मिलती है और भक्त मंदिरों में जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। हरिद्वार में कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपने रहस्य या किसी अन्य कारण से प्रसिद्ध हैं। इन्हीं मंदिरों में नीलेश्वर महादेव मंदिर भी शामिल है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में महादेव के दर्शन करने से भक्त की सभी मुरादें पूरी होती हैं और शिव जी की कृपा बरसती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं नीलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी कथा के बारे में।

हरिद्वार के नील पर्वत पर स्थित नीलेश्वर महादेव मंदिर आदिकाल से स्थापित माना जाता है। नीलेश्वर महादेव मंदिर का वर्णन शिव महापुराण में भी मिलता है। यहां मंदिर के गर्भगृह में ढाई फीट ऊंचा स्वयंभू शिवलिंग और उनके सामने नंदी जी विराजमान हैं। सावन के महीने में भक्त इस शिवलिंग की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां शिव पूजन करने से साधक को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है और महादेव की कृपा से सुख-समृद्धि वृद्धि होती है।

नीलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

हलाहल विष की कथा- देवताओं की खोई हुई शक्ति को पुनः लौटाने और अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया गया था। इस मंथन के समय हलाहल नाम का अधिक घातक विष निकला, जिसके प्रभाव से पूरी सृष्टि पर विनाश का संकट मंडराने लगा। ऐसे में महादेव ने इस विष का पान कर पूरी सृष्टि की रक्षा की। विष के प्रभाव से महादेव के गले में तीव्र जलन होने लगी और उनका कंठ नीला पड़ गया। महादेव का कंठ नीला पड़ जाने के कारण ही इस पर्वत का नाम नील पर्वत पड़ा।

माता सती और प्रजापति दक्ष की कथा- अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, जब राजा दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान किया, तो माता सती ने यज्ञ की अग्नि में कूदकर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। इसके बाद क्रोधित महादेव ने हरिद्वार के नील पर्वत पर खड़े होकर दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विध्वंस देखा था। नील पर्वत पर स्थित होने के कारण ही यह पवित्र स्थान नीलेश्वर नाम से प्रसिद्ध हुआ।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।