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दशहरे पर जहां देशभर में जलता है रावण, वहीं केरल के इस गांव में दुर्योधन को चढ़ाई जाती है ताड़ी

Published: Tue, 20 Oct 2026 12:35 PM (IST)

केरल के कोल्लम जिले के मालानाडा गांव में विजयदशमी के अवसर पर दुर्योधन की अनोखी पूजा की जाती है, जो ...और पढ़ें

मालानाड दुर्योधन मंदिर (Picture Credits- AI Images)

मालानाड दुर्योधन मंदिर (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में आज विजयदशमी यानी दशहरा का त्योहार मनाया जा रहा है। यह पर्व बुराई पर अच्छी की जीत का प्रतीक मानकर मनाया जाता है। लेकिन दक्षिण भारत के केरल राज्य के कोल्लम जिले के मालानाड गांव में एक अनोखी परंपरा जो इसे देश के अन्य विजयदशमी मोहत्सव से अलग बनाती है।

यहां नवरात्र के दौरान महाभारत काल के उस दुर्योधन की पूजा की जाती है, जिसे हिंदू दर्शन में अधर्म और अहंकार का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र में हजारों श्रद्धालु कौरव राजा दुर्योधन के मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

मंदिर प्रशासन के मुताबिक, नवरात्र के दौरान यहां कोई भी विशेष पूजा आयोजित नहीं की जाती है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर का अनोखा चढ़ावा

मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपनी मान्यताओं के हिसाब से सोना, चांदी, बैल और मुर्गी जैसे अनोखे चढ़ावें भी चढ़ाते हैं, लेकिन यहां का सबसे लोकप्रिय चढ़ावा ताड़ी है।

ताड़ी खरीदने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें लगती हैं। इसकी वजह मंदिर से जुड़ी एक लोकप्रिय पौराणिक कथा है, जो महाभारत के दुर्योधन की अलग छवि दिखाती है।

why duryodhana is worshipped on dussehra in kerala malanada toddy tradition

(AI Images)

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

स्थानीय प्रचलित कथाओं के मुताबिक, वनवास के बाद अज्ञातवास के दौरान पांडवों की तलाश में दुर्योधन मालानाडा पहुंचा था। उसे खबर मिली थी कि पांडव इसी इलाके में छिपे हैं। पांडवों की तलाश करते-करते वह गांव के एक समृद्ध कुरवा परिवार के घर जा पहुंचा। अनुसूचित जाति से जुड़े इस परिवार ने दुर्योधन का बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया और उसे स्थानीय ताड़ी पीने को दी।

भले ही दुर्योधन पांडवों को खोजने में सफल तो नहीं हुआ, लेकिन परिवार के आतिथ्य से इतना प्रसन्न हुआ कि उसने दोबारा आने की बात कही। माना जाता है कि इसी घटना के बाद से यहां पर दुर्योधन की पूजा की परंपरा शुरू हुई। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दुर्योधन सिर्फ महाभारत से जुड़ा एक पात्र ही नहीं, बल्कि आशीर्वाद देने वाले राजा माने जाते हैं।

मंदिर से जुड़ी अनोखी खासियत

केरल के मालानाडा गांव में स्थित दुर्योधन के मंदिर से जुड़ी एक खासियत यह भी है कि यहां पूजा करने वाले पुजारी अनुसूचित जाति से आते हैं। जबकि मंदिर समिति में अलग-अलग जातियों और सामाजिक समूहों के प्रतिनिधि में शामिल हैं। बताया जाता है कि, जब भारत में छूआछूत का चलन था, तभी इस मंदिर में सभी जातियों को दर्शन करने की आजादी थी।

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