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कौन हैं देवी विनायकी जिन्‍हें कहा जाता है श्री गणेश का स्‍त्री स्‍वरूप, यहां मिलते हैं इनकी प्रतिमा और चित्र

Published: Fri, 18 Sep 2026 09:00 AM (IST)

देवी विनायकी को भगवान गणेश का स्त्री स्वरूप माना जाता है, जिन्हें गणेशानी और गणेश्वरी जैसे अन्य नामों से भी ...और पढ़ें

जानिए कौन हैं देवी विनायकी, भगवान गणेश का स्त्री स्वरूप और इनकी पूजा का महत्व

जानिए कौन हैं देवी विनायकी, भगवान गणेश का स्त्री स्वरूप और इनकी पूजा का महत्व

HighLights

  1. देवी विनायकी भगवान गणेश का स्त्री स्वरूप मानी जाती हैं।

  2. इन्हें गणेशानी, गणेश्वरी और गजाननी जैसे नामों से भी जाना जाता है।

  3. राजस्थान, ओडिशा, तमिलनाडु में मिलते हैं इनके प्राचीन मंदिर।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और शुभता का देवता माना जाता है। गणेश जी के कई स्वरूपों का वर्णन धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। इन्हीं में से एक अनोखा स्वरूप देवी विनायकी का भी है, जिन्हें भगवान गणेश का स्त्री स्वरूप माना जाता है। आइए जानते हैं देवी विनायकी से जुड़ी खास बातें और कहां-कहां श्री गणेश के इस स्‍वरूप की प्रतिमाएं और चित्र पाए जाते हैं। 

कई नामों से जानी जाती हैं देवी विनायकी

भगवान गणेश के इस स्त्री स्वरूप को अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इन्हें विनायकी, गणेशानी, गणेश्वरी और गजाननी जैसे नामों से भी संबोधित किया जाता है। देवी विनायकी का स्वरूप देखने में भगवान गणेश से मिलता-जुलता ही होता है। हालांकि, इनका स्वरूप स्त्री का होता है।

देवी विनायकी से जुड़ी मान्यताओं में इन्हें शक्ति और गणेश का मिलाजुला स्‍वरूप माना जाता है। भारत के कुछ प्राचीन मंदिरों में देवी के इस अनोखे स्वरूप की प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं।

राजस्थान से लेकर दक्षिण भारत तक मिलते हैं प्रमाण

राजस्थान के खेड़ में देवी विनायकी की एक प्राचीन मूर्ति  है। इसे काफी पुराना माना जाता है। इसके अलावा ओडिशा के हीरापुर स्थित 64 योगिनी मंदिर में भी देवी विनायकी का स्वरूप देखने को मिलता है। यह मंदिर अपनी प्राचीन योगिनी प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध है।

दक्षिण भारत में भी देवी विनायकी की पूजा देखने को मिलती है। तमिलनाडु के कन्याकुमारी क्षेत्र में स्थित थानुमालयन मंदिर में देवी विनायकी का एक प्राचीन स्‍कल्‍पचर है। यह मंदिर करीब 1300 साल पुराना बताया जाता है।

क्या है देवी विनायकी की पौराणिक कथा?

देवी विनायकी से जुड़ी एक पौराणिक कथा में अंधक नाम के राक्षस का वर्णन मिलता है। मान्यता के अनुसार, अंधक माता पार्वती को अपनी पत्नी बनाना चाहता था। माता पार्वती की रक्षा के लिए भगवान शिव ने अंधक पर प्रहार किया।

कथा के अनुसार, अंधक के रक्त की बूंदें जब जमीन पर गिरती थीं, तो उनसे नए राक्षस उत्पन्न होने लगते थे। इससे उसकी शक्ति बढ़ती जाती थी। इस स्थिति को देखकर देवी-देवताओं ने अपनी शक्तियों का आह्वान किया।

कैसे हुआ विनायकी स्वरूप का प्रकट होना?

देवी-देवताओं की शक्तियों से अनेक मातृ शक्तियां प्रकट हुईं। इसके बाद भगवान शिव ने अंधक से युद्ध किया। भगवान गणेश ने भी अपने मातृ शक्ति स्वरूप में अंधक का सामना किया। कथा में बताया जाता है कि गणेश जी ने अंधक का वध कर उसके रक्त की बूंदों को धरती पर गिरने से रोक दिया।

इसी प्रसंग से देवी विनायकी का स्‍वरूप लोकप्रिय हुआ, उन्हें गणेश जी की स्त्री शक्ति या स्त्री स्वरूप माना जाता है। यही वजह है कि कुछ स्थानों पर देवी विनायकी की विशेष रूप से पूजा की जाती है।

देवी विनायकी का स्वरूप है बेहद खास

देवी विनायकी की प्रतिमा में गणेश जी से मिलते-जुलते कई प्रतीक दिखाई देते हैं। हाथी के मुख और स्त्री शरीर के कारण यह स्वरूप अपने आप में बेहद अनोखा माना जाता है। देवी विनायकी से जुड़ी मान्यताएं भारत की प्राचीन धार्मिक और शाक्त परंपराओं की विविधता को दर्शाती हैं।

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