उत्तराखंड का रहस्यमयी मां कोटगाड़ी मंदिर, जहां चिट्ठी और स्टाम्प पेपर पर लिखकर अर्जी लगाने से मिलता है न्याय
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित कोटगाड़ी देवी मंदिर न्याय की देवी को समर्पित है, जहां भक्त अपनी समस्याओं और अन्याय ...और पढ़ें

पिथौरागढ़ का रहस्यमयी कोटगाड़ी मंदिर

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखंड में कई ऐसे देवी-देवताओं के मंदिर हैं, जो रहस्यमयी होने के साथ श्रद्धा और भक्ति के केंद्र हैं। लेकिन आज हम आपको उत्तराखंड के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां श्रद्धालु अपनी परेशानी लेकर आते हैं।
पिथौरागढ़ जिले में स्थित 'कोटगाड़ी देवी मंदिर' जहां भक्त अपनी परेशानियां लेकर मां के दर्शन के लिए आते हैं। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, जब व्यक्ति को कहीं से न्याय नहीं मिलता है, तो वह मां के दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुंचता है। पांखू क्षेत्र में स्थित इस मंदिर को मां कोकिला देवी के मंदिर से भी जाना जाता है।
मंदिर जहां न्याय की गुहार लगाते हैं श्रद्धालु
इस मंदिर में भक्त अपनी आपदा-विपदा, अन्याय, असमय समस्या के निवारण के लिए पुकार लगाते हैं, मन्नत मांगते हैं और न्याय की गुहार लगाते हैं। कुमाऊं क्षेत्र में स्थित कई मंदिरों की तरह कोटगाड़ी मंदिर भी लोगों के बीच अत्यंत पवित्र धार्मिक स्थल में से एक है।
जहां लोग न्याय की आस लेकर आते हैं और न सिर्फ अपने लिए बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी। माना जाता है कि भगवती वैष्णवी के दिव्य दरबार में पांचवीं पीढ़ी तक को न्याय मिलता है।
कोटगाड़ी मंदिर से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं
पुराने समय में भक्त खुद उपस्थित होकर अपनी समस्या को देवी के चरणों में रखते थे और अपने साथ हुए अन्याय को जाहिर करने के लिए प्रतीकात्मक रूप से देवता के सामने मनौती मानते थे। मंदिर में आने वाले कई लोग अपनी समस्याओं को पेपर्स, पत्रों और कानूनी स्टाम्प पेपर पर लिखकर देवी को सौंपते हैं।
मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन है। बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना चंद वंश के प्रतापी शासकों के दौरान हुई थी। मंदिर में देवी पूजा सात्विक वैष्णव शक्ति रूप में की जाती है। भक्त देवी को खीर और प्रसाद अर्पित करते हैं। चैत्र और आश्विन की अष्टमी के दौरान और भाद्रपद में ऋषि पंचमी के मौके पर यहां मेला भी लगता है। नवरात्र के दौरान मुख्य मंदिर से थोड़ी दूरी पर ग्वाल और भैरव देव का मंदिर स्थित है।
कोटगाड़ी मंदिर की एक खास बात गर्भगृह के नीचे बहने वाली एक सतत भूमिगत धारा है। यह पानी न सिर्फ पवित्र है बल्कि सिंचाई और पीने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है और माना जाता है कि क्रांति नदी का उद्गम स्थल है, जिसका जिक्र स्कंद पुराण में भी देखने को मिलता है।
इसके अलावा मंदिर का आकर्षण देवी की पवित्र योनि चिह्न है जो ढका रहता है। मुख्य मंदिर के साथ-साथ सूरजमल और छुरमल को समर्पित भी मंदिर है, दो भाई जिन्हें बागदेव के रूप में पूजा जाता है। मंदिर परिसर में नाग देवता की बड़ी मूर्ति भी है। इसके अलावा मंदिर परिसर के पास जलता हुआ दीपक लेकर खड़ी दो धातु निर्मित स्त्री प्रतिमाएं भी दर्शन के योग्य हैं।
मंदिर में दूर-दूर से आते हैं पत्र
आज के आधुनिक दौर में भी कोटगाड़ी मां में भक्तों की गहरी आस्था है। भक्त अपनी समस्याओं को डाक द्वारा भेजते हैं। उन्हें विश्वास है कि देवी उनकी समस्त परेशानियों को दूर करेंगी। इस मंदिर में भक्त पूरे साल भारत से आते हैं। मंदिर में चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान भव्य उत्सव देखने को मिलता है।
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