दो भुजाओं से महिषासुर का संहार! मां बिरजा के इस स्वरूप की कहानी है बेहद खास
ओडिशा के जाजपुर में स्थित मां बिरजा देवी मंदिर 18वां शक्तिपीठ है, जहां माता सती की नाभि गिरी थी। यह ...और पढ़ें

बिराजा मंदिर का इतिहास और महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ओडिशा के जाजपुर शहर में स्थित है मां बिरजा देवी का मंदिर, जो बैतरानी नदी के किनारे बसा हुआ है। मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति की पूजा की जाती है, जिन्हें 'मां बिरजा' के नाम से जाना जात है। यहां देश का 18वां शक्तिपीठ भी है, जहां माता सती की नाभि गिरी थी।
इसके अलावा यह मंदिर देश का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां मां दुर्गा महिषासुर मर्दिनी के रूप में दो भुजाओं को धारण किए हैं। मूर्ति में मां दुर्गा को सिंह (शेर) की पीठ पर सवार महिषासुर नामक राक्षस की छाती को भेदते हुए दिखाया गया है।
मां बिरजा मंदिर का इतिहास
माना जाता है कि, धर्म के देवता ने एक यज्ञ किया था, जिसमें भगवान शिव को आर्यों का देवता माना गया और धरती माता वेदी के रूप में प्रकट हुईं। माना जाता है कि ब्रह्मा ने बैतरा नदी के किनारे कुछ यज्ञ किए थे। यज्ञ की अग्नि से मां पार्वती प्रकट हुईं और ब्रह्मा ने उन्हें मां बिरजा नाम दिया।
बिरजा क्षेत्र त्रिभुजाकार है। इस क्षेत्र की रक्षा भगवान शिव तीनों दिशाओं से करते हैं। मां बिरजा त्रिभुज के बीच में विराजमान हैं और भगवान शिव तीनों कोनों पर विराजमान हैं।
मंदिर में स्थित मां दुर्गा की अनोखी मंदिर
मंदिर में स्थित बिरजा देवी की खड़ी प्रतिमा दो हाथों वाली है। उन्होंने अपने बाएं हाथ से महिषासुर की पूंछ पकड़ रखी है और दायें हाथ से त्रिशूल से उसका वध कर रही है। मां दुर्गा की ऐसी प्रतिमा काफी कम ही देखने को मिलती है क्योंकि अधिकतर प्राचीन देवी प्रतिमाओं में उन्हें 8 भुजाओं में दर्शाया जाता है।
बिरजा देवी मंदिर में स्थापित मां बिरजा का मुकुट भी काफी खास है। उनके मुकुट पर गणेश, नागराज, वासुकि, योनि समेत शिवलिंग, चंद्र इत्यादि की सूक्ष्म प्रतिमाएं हैं। उनका मुकुट हिंदू धर्म के चारों पंथों का मिश्रण है।

बिरजा मंदिर संग्रहालय
मंदिर परिसर में प्रवेश करने के साथ ही बाईं तरफ एक संग्रहालय है जो देवी की कथा से परिचत है। कक्ष के बीचों-बीच महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती के प्रकट होने का दृश्य दिखाया गया है।
मंदिर में प्रवेश करने के साथ आप सबसे देवी के वाहन सिंह के दर्शन करते हैं, जो एक शिला स्तंभ पर विराजमान हैं। इस मंदिर का निर्माण ओडिया मंदिर वास्तु शैली के आधार पर किया गया है।
बिरजा देवी मंदिर के उत्सव
शारदीय नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में 16 दिवसीय दुर्गा उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान सिंह ध्वज नामक एक भव्य रथ पर बिरजा देवी की रथ यात्रा आयोजित की जाती है। यह भी इस शक्तिपीठ की खासियत है।
यज्ञ कुंड से देवी के उद्भव की याद में माघ मास की अमावस्या अर्थात् त्रिवेणी अमावस्या के दिन भी उत्सव भी मनाया जाता है।
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