श्रीमंत दगडूशेठ गणपति मंदिर का रहस्य: क्यों पड़ा हलवाई के नाम पर बप्पा का नाम, यहां हर मन्नत होती है पूरी
पुणे के प्रसिद्ध श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर का नाम एक मिठाई कारोबारी के नाम पर क्यों पड़ा, यह रहस्य जानने के लिए लेख को अंत तक पढ़ें।
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श्रीमंत दगडूशेठ गणपति मंदिर
HighLights
दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर का नाम संस्थापक के नाम पर।
प्लेग में बेटे को खोने के बाद मंदिर की स्थापना हुई।
गुरु की सलाह पर गणेश जी की सेवा से मंदिर बना।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देश भर में श्री गणेश भगवान के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। गणेश उत्सव के दौरान सभी गणेश मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहत है। पुणे का श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर भी देश के प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में से एक है। यहां हर साल बड़ी संख्या में भक्त भगवान गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं।
सोचने वाली बात यह है कि इस मंदिर से कोई पौराणिक कथा नहीं जुड़ी है, फिर इस मंदिर के लिए कहा जाता है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। सबसे खास बात इस मंदिर में गणपति जी की प्रतिमा के नाम में छुपी हुई है। यहां पर बप्पा का नाम एक हलावई के नाम के ऊपर रखा गया है। आखिर ऐसा क्यों किया गया? चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
दगडूशेठ हलवाई के नाम पर पड़ा मंदिर का नाम
मंदिर का नाम इसके संस्थापक दगडूशेठ गडवे के नाम पर पड़ा। दगडूशेठ पुणे के जाने-माने मिठाई कारोबारी यानी हलवाई थे। वह काफी संपन्न होने के साथ ही धार्मिक और दयालु स्वभाव के व्यक्ति भी थे। लोगों की मदद करने और दान-पुण्य करने के कारण उन्हें सम्मान के तौर पर 'श्रीमंत' की उपाधि मिली थी। इस मंदिर
की स्थापना से जुड़ी कहानी बेहद भावुक करने वाली है। बताया जाता है कि वर्ष 1893 के आसपास पुणे में प्लेग जैसी गंभीर बीमारी फैली हुई थी। इस बीमारी के कारण दगडूशेठ और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने अपने इकलौते बेटे को खो दिया।
बेटे की मौत से दोनों गहरे सदमे में चले गए। यह देखकर उनके गुरु जी ने उन्हें भगवान श्री गणेश की सेवा करने की सलाह दी। सेठ जी भगवान की सेवा और भक्ती में कुछ इस तरह से लीन रहने लगे, कि गणेश जी ने उन्हें सपने में अपना मंदिर बनवाने का आदेश दिया।
बप्पा के आदेश से वर्ष 1893 में दगडूशेठ ने गणेश जी की मूर्ति की स्थापना कराई और उनके लिए एक छोटा मंदिर बनवाया। समय के साथ यह स्थान भक्तों के बीच लोकप्रिय होता गया। दगडूशेठ स्वयं हलवाई का काम करते थे, इसलिए लोगों के बीच गणपति की पहचान दगडूशेठ हलवाई गणपति के रूप में होने लगी। धीरे-धीरे यही नाम मंदिर की पहचान बन गया।
मंदिर से जुड़ी आस्था
आज दगडूशेठ गणपति मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। भक्त यहां भगवान गणेश के दर्शन करने और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करने आते हैं। गणेश उत्सव के दौरान मंदिर में विशेष सजावट की जाती है। भगवान गणेश की प्रतिमा को सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है। इस दौरान मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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