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राधा अष्टमी पर जरूर करें बरसाना के श्रीजी मंदिर के दर्शन, एक क्लिक में पढ़ें इतिहास और कपाट खुलने का समय

Published: Tue, 15 Sep 2026 01:16 PM (IST)

राधा अष्टमी 19 सितंबर को मनाई जाएगी, इस दिन बरसाना स्थित श्रीजी मंदिर के दर्शन का विशेष महत्व है। यह ...और पढ़ें

बेहद खास है राधा रानी मंदिर

बेहद खास है राधा रानी मंदिर 

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2026) का पर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 19 सितंबर को है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह दिन किशोरी जी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि राधा अष्टमी के शुभ अवसर पर राधा रानी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में खुशियों का आगमन होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस दिन भक्त राधा रानी के मंदिरों में लाड़ली जी के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।

इस दौरान बरसाना के राधा रानी के मंदिर (Radha Rani Mandir Barsana) में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। राधा अष्टमी के दिन इस मंदिर में खास रौनक होती है। यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं इस मंदिर से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां।

कहां है राधा रानी का मंदिर?

राधा रानी को समर्पित यह मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना की भानुगढ़ पहाड़ी पर स्थित है। यहां राधा रानी का बेहद प्राचीन मंदिर है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मंदिर को 'लाडली जी का मंदिर' और 'श्रीजी मंदिर' भी कहा जाता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए कई सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए यहां रोपवे की भी सुविधा है। इस मंदिर को बनाने के लिए लाल पत्थर का प्रयोग किया गया है। इस मंदिर के पास भानु महल, अष्टसखी मंदिर और ब्रह्मा मंदिर भी स्थित हैं।

मंदिर का इतिहास

मंदिर के बारे में ऐसा बताया जाता है कि इस राधा रानी मंदिर की नींव भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र राजा वज्रनाभ ने रखी थी। इसके बाद इस मंदिर का निर्माण राजा वीर सिंह ने 1675 ई. में करवाया था।

राधा अष्टमी पर खास तरीके से सजता है मंदिर

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में राधा रानी के दर्शन करने से भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं और शुभ फल प्राप्त होते हैं। राधा अष्टमी या अन्य खास अवसरों पर मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। इस दौरान मंदिर का नजारा देखकर मन आनंदित हो जाता है। पूरे परिसर में राधा रानी के जयकारे और सुंदर-सुंदर भजन गूंजते रहते हैं। इसके अलावा यहां लठमार होली जैसे पर्वों के दौरान भी भक्तों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। राधा अष्टमी के दिन राधा रानी की विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद किशोरी जी को विशेष भोग अर्पित किया जाता है। इसके बाद प्रसाद को सभी भक्तों में बांटा जाता है।

कितने बजे खुलते हैं मंदिर के कपाट?

अगर आप राधा रानी के मंदिर जाना चाहते हैं, तो जाने से पहले इस मंदिर के समय के बारे में जरूर जान लें। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मंदिर के कपाट सुबह 05 बजे खुलते हैं और दोपहर 02 बजे कपाट बंद होते हैं। शाम को किशोरी जी दर्शन के लिए मंदिर 05 बजे खुलता है और 09 बजे मंदिर बंद होता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।