मोती डूंगरी मंदिर: गणेश चतुर्थी पर सिंजारा उत्सव, मेहंदी लगाने से होती है शादी; पढ़ें मंदिर का अनोखा इतिहास
जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए प्रसिद्ध है। यहां गणेश चतुर्थी पर सिंजारा ...और पढ़ें

मोती डूंगरी गणेश मंदिर: जयपुर का वह धाम जहां मेहंदी से पूरी होती हैं मनोकामनाएं
HighLights
जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर मनोकामना पूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।
गणेश चतुर्थी पर सिंजारा उत्सव, मेहंदी चढ़ाने की अनोखी परंपरा।
मंदिर में मेहंदी लगाने से शादी की बाधाएं दूर होती हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे देश में न जाने कितने ही ऐसे मंदिर हैं जिनके दर्शन के लिए भक्त मीलों दूर से आते हैं। यही नहीं इन मंदिरों में भक्तों की मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।
ऐसा ही खास है जयपुर शहर का मोती डूंगरी मंदिर। जयपुर के जीवंत शहर के बीचों-बीच, जहां पुरानी कहानियां और आधुनिक चमत्कार आपस में मिलते हैं, वहीं मौजूद है मोती डूंगरी गणेश मंदिर। यह एक ऐसी पवित्र जगह जो भक्तों और सैलानियों, दोनों को ही अपनी तरफ आकर्षित करती है और जयपुर शहर ही नहीं बल्कि पूरे देश से भक्तों को भारी भीड़ इकट्ठा होती है।
इस मंदिर के लिए मान्यता है कि यहां आप जो भी मान्यता लेकर आते हैं वो जल्द ही पूरी हो जाती है। यही नहीं अगर किसी की शादी में बार-बार बाधाएं आ रही हैं और वो मंदिर में मेहंदी चढ़ाता है और वही मेहंदी अपने हाथों में लगाता है तो एक साल के भीतर ही उसकी शादी की बाधाएं दूर हो जाती हैं।
इस मंदिर में गणेश चतुर्थी के दिन सिंजारा उत्सव मनाया जाता है, जिसमें कई कुंटल मेहंदी चढ़ती है। आइए जानें क्या है मंदिर की खासियत और इतिहास।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर का इतिहास
इस मंदिर को 1761 में दूरदर्शी सेठ जय राम पालीवाल ने बनवाया था। मोती डूंगरी गणेश मंदिर का इतिहास एक दिलचस्प कहानी से जुड़ा है। कहानी के अनुसार, मेवाड़ के राजा एक लंबी यात्रा से लौट रहे थे और बैलगाड़ी पर भगवान गणेश की एक विशाल मूर्ति ले जा रहे थे। राजा ने यह तय किया था कि वो मंदिर की स्थापना उसी जगह करेंगे जहां बैलगाड़ी पहली बार रुकेगी।
इस तरह, मोती डूंगरी पहाड़ियों की तलहटी में इस मंदिर को अपना स्थायी स्थान मिला। यह उस दैवीय इच्छा का जीता-जागता उदाहरण है जिसने राजा का मार्गदर्शन किया था। आज भी भगवान गणेश का मोती डूंगरी मंदिर अपनी दैवीय शक्ति के लिए मशहूर है। आज भी पूरे साल यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। हर बुधवार को यहां मेला लगता है।
पूरी होती हैं मनोकामनाएं
जयपुर के स्थानीय लोगों के लिए मोती डूंगरी मंदिर का बहुत महत्व है। किसी भी शुभ काम के लिए पहला निमंत्रण इसी मंदिर के भगवान गणेश को देने की परंपरा है।
शादीशुदा जोड़े भी पुरानी परंपराओं को निभाते हुए, अपनी शादी के बाद पहले दिन मंदिर जाकर भगवान का आशीर्वाद जरूर लेते हैं। यही नहीं, भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और यही नहीं जिसकी शादी में परेशानियां आ रही होती हैं, उसे भी इस मंदिर में जाकर समस्या का समाधान मिलता है।
सालों पुरानी है मेहंदी और सिंजारे की रस्म
मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सालों से गणेश चतुर्थी के दिन सिंजारा उत्सव मनाया जाता है और इसमें लोग बप्पा को मेहंदी चढ़ाते हैं। इस अवसर पर गणपति को कई कुंटल मेहंदी चढ़ा दी जाती है। यही नहीं जो भक्त इस मेहंदी को हाथों में लगा लेता है उसके लिए जल्द ही शादी के योग बनते हैं। कुंवारे लोग इस मंदिर में इसी मनसा से मेहंदी चढ़ाते हैं कि जल्द ही उनकी शादी में आने वाली बाधाएं दूर हो जाएं।
इस मंदिर में कई ऐसी परंपराएं निभाई जाती हैं जो भक्तों के लिए खास मानी जाती हैं और इस मंदिर को मनोकामनाएं पूरा करने के लिए भी एक अनोखा धार्मिक स्थल कहा जाता है।
यह भी पढ़ें- सवा लाख दूर्वा, सवा लाख पुष्प और तिरंगे का पूजन... उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में तिथि अनुसार मनाया स्वाधीनता दिवस
यह भी पढ़ें- “गणपति बप्पा मोरिया” क्यों कहते हैं? जानिए इसके पीछे छिपी भक्त और भगवान की अनोखी कहानी
Source: incredibleindia.gov.in, motidungri.com
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
