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शरद पूर्णिमा की रात यहीं हुआ था राधा-कृष्ण का महारास, चंद्रदेव भी ठहर गए थे आसमान में

Published: Sun, 25 Oct 2026 10:05 AM (IST)

शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, जब भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया ...और पढ़ें

गोवर्धन के चंद्र सरोवर का रहस्य (Picture Credit- AI Generated)

गोवर्धन के चंद्र सरोवर का रहस्य (Picture Credit- AI Generated) 

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2026) का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था। इसी वजह से इस पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी रोशनी से अमृत की वर्षा होती है।

शरद पूर्णिमा के अवसर पर खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है और सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसके अलावा मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन के मंदिरों में खास उत्सव मनाया जाता है। मंदिरों को सफेद फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। ब्रज में कई धार्मिक स्थल हैं, जिनका विशेष महत्व है। इन्हीं में शामिल है गोवर्धन में स्थित चंद्र सरोवर। धार्मिक मान्यता है कि इसी जगह पर भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात को राधारानी और गोपियों के साथ महारास किया था। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इससे जुड़ी खास बातें।

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भगवान श्रीकृष्ण से है चंद्र सरोवर का संबंध

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मथुरा जिले में गोवर्धन के पास परासौली में चंद्र सरोवर स्थित है। इसे ब्रज का बेहद पवित्र और धार्मिक स्थल माना जाता है। लोकमान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर राधारानी और गोपियों के साथ महारास रचाया था। इस महारास के अद्भुत दृश्य को देखने के लिए चंद्रदेव भी आसमान में ठहर गए थे। ऐसा बताया जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात 6 महीने की हो गई थी, जिसे ब्रह्मा की एक रात्रि के समान माना जाता है।

शरद पूर्णिमा की रात यहां चंद्र देव के रुकने के कारण इस जगह का नाम चंद्र सरोवर पड़ा। इसी पवित्र जगह पर भगवान श्रीकृष्ण ने अद्भुत महारास किया था। चंद्र सरोवर के पास महाकवि सूरदास जी की प्रमुख साधना स्थली भी है।

मंदिरों में शरद पूर्णिमा पर होती है खास रौनक

जब श्रद्धालु गोवर्धन यात्रा व ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा करने आते हैं, तो वे चंद्र सरोवर भी जरूर आते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीलाभूमि ब्रजमंडल में होने वाली ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा के अंतर्गत यह पवित्र स्थल भी आता है। परिक्रमा मार्ग में कई मंदिर हैं, जहां पर शरद पूर्णिमा के अवसर पर खास रौनक देखने को मिलती है।

शरद पूर्णिमा के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण का सफेद शृंगार करने की परंपरा है और उन्हें सफेद वस्त्र पहनाए जाते हैं। साथ ही सफेद चीजों का भोग लगाया जाता है। प्रभु के इस मनोहारी रूप के दर्शन करने के लिए ब्रज के मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिलती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है