साल में सिर्फ एक बार बांसुरी धारण करते हैं बांके बिहारी जी, शरद पूर्णिमा पर क्यों बदल जाता है ठाकुरजी का स्वरूप?
शरद पूर्णिमा पर श्री बांके बिहारी जी साल में केवल एक बार बांसुरी धारण करते हैं और सफेद पोशाक में ...और पढ़ें

शरद पूर्णिमा पर ऐसा होता है बांके बिहारी जी का दिव्य शृंगार(Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल आश्विन माह के अंत में शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है, क्योंकि इस रात चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण रहता है और उसकी रोशनी से अमृत की वर्षा होती है। इसलिए इस रात को खुले आसमान के नीचे खीर रखने का विधान है, जिसे सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2026) के पर्व का श्री बांके बिहारी जी के भक्त बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि साल में केवल एक बार शरद पूर्णिमा के दिन ही बांके बिहारी बांसुरी धारण करते हैं। साथ ही ठाकुरजी को सफेद रंग के कपड़े पहनाए जाते हैं और उनका मनमोहक शृंगार किया जाता है।
यह जानकर आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर शरद पूर्णिमा के दिन ही ठाकुरजी बंसी क्यों धारण करते हैं? इस विषय पर हमारी बातचीत वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायत श्रीनाथ गोस्वामी जी से हुई है। आइए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
शरद पूर्णिमा पर सफेद पोशाक और हाथों में बांसुरी का रहस्य
गोस्वामी जी ने बताया कि शरद पूर्णिमा का उत्सव ठाकुरजी के लिए बेहद खास माना जाता है। जब वृंदावन में महारास हुआ था, तो वह रात 6 महीने की हो गई थी। इस दिन ठाकुरजी की विशेष आरती की जाती है और आरती करने से पहले एक पद गाया जाता है।
मोर मुकुट कटि काछनी, कर मुरली उर माल।
यहि बानिक मो मन बसौ, सदा बिहारीलाल॥
उन्होंने बताया कि यह पद इस बात को दर्शाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन ठाकुरजी सिर पर मोर पंख, कमर में पीला वस्त्र, हाथों में बांसुरी और गले में माला धारण करते हैं। वैसे तो रोजाना श्री बांके बिहारी जी की बांसुरी सिंहासन पर रखी रहती है, लेकिन केवल शरद पूर्णिमा के दिन ही बांके बिहारी जी बांसुरी को हाथों में धारण करते हैं और अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।
इस दिन बांके बिहारी जी सफेद रंग की पोशाक पहनते हैं। महारास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जिस स्वरूप में थे, उसी रूप में इस दिन बांके बिहारी दर्शन देते हैं।
इसके अलावा शरद पूर्णिमा के दिन बांके बिहारी जी को सफेद चीजों का भोग लगाया जाता है। उन्हें खीर और चंद्रकला आदि का भोग लगाया जाता है, जिसके बाद इसे भक्तों में वितरित किया जाता है। इसी दिन से शरद ऋतु की शुरुआत भी होती है। शरद ऋतु में बांके बिहारी जी को गर्म कपड़े पहनाए जाते हैं और मेवे आदि का भोग लगाया जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन बांके बिहारी जी के इस अद्भुत रूप के दर्शन करने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं।
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