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कब है शरद पूर्णिमा? चांदनी रात में बरसेगा अमृत, खीर के प्रसाद और मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी है खास मान्यता

Published: Sat, 24 Oct 2026 03:40 PM (IST)

शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसमें चांदनी रात में खीर रखने और मां लक्ष्मी व भगवान ...और पढ़ें

चांदनी रात में खीर रखने की सदियों पुरानी परंपरा

चांदनी रात में खीर रखने की सदियों पुरानी परंपरा

HighLights

  1. खीर को चांदनी रात में रखकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

  2. मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा से सुख-समृद्धि आती है।

  3. शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026 को शुरू होगी, 26 अक्टूबर को समाप्त।

संवाद सूत्र,सूर्यपुरा (रोहतास)। शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। इस दिन पूर्णिमा की चांदनी में खीर रखने और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा प्रचलित है। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। इसी विश्वास के चलते लोग खुले आसमान के नीचे खीर रखकर चंद्रमा की रोशनी में उसे ग्रहण करने की तैयारी करते हैं।

चांदनी रात में खीर रखने की सदियों पुरानी परंपरा

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी पूर्ण आभा में दिखाई देता है। इस अवसर पर घरों की छतों और खुले स्थानों पर खीर रखी जाती है।

मान्यता है कि चंद्रमा की किरणों के संपर्क में आने से खीर में विशेष गुण आ जाते हैं। हालांकि, यह धार्मिक आस्था से जुड़ी मान्यता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ा है पर्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। कई जगहों पर भक्त रात में जागकर पूजा-अर्चना करते हैं।

इस वजह से इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी इस रात जागने वाले भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं।

भगवान विष्णु की पूजा का भी महत्व

शरद पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा और आराधना भी की जाती है। श्रद्धालु घरों में पूजा-पाठ करते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं। कई स्थानों पर मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।

कब है शरद पूर्णिमा?

  • पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:55 बजे
  • पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 26 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:41 बजे
  • चंद्रोदय का समय: शाम 5:00 बजे

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