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26 अक्टूबर से शुरू होगा कार्तिक स्नान, ब्रह्म मुहूर्त में नहाने से लेकर आंवला पूजा तक के खास नियम और फायदे

Published: Sat, 24 Oct 2026 10:45 AM (IST)

कार्तिक मास का स्नान 26 अक्टूबर से शुरू होगा, जिसमें ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और आंवला पूजा का विशेष महत्व ...और पढ़ें

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और सुबह की धूप का महत्व

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और सुबह की धूप का महत्व

HighLights

  1. 26 अक्टूबर से कार्तिक स्नान की परंपरा होगी शुरू।

  2. ब्रह्म मुहूर्त स्नान से शारीरिक सक्रियता और विटामिन डी।

  3. आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास, पूजा का महत्व।

दिलीप कुमार ओझा, शाहपुर (भोजपुर)। शरद पूर्णिमा के बाद कार्तिक मास की प्रतिपदा तिथि से कार्तिक स्नान की परंपरा शुरू होती है। इस वर्ष 26 अक्टूबर से कार्तिक स्नान प्रारंभ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में स्नान, दान और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।

श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पूजा-पाठ करते हैं और आंवले के वृक्ष में जल अर्पित कर परिक्रमा करते हैं। धार्मिक आस्था से जुड़ी यह परंपरा दिनचर्या में अनुशासन और शारीरिक सक्रियता बनाए रखने का अवसर भी देती है।

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और सुबह की धूप का महत्व

कार्तिक स्नान के दौरान श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। इस परंपरा में सूर्योदय के समय पूजा और खुले वातावरण में समय बिताने का भी महत्व है।

शाहपुर रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ. अतिउल्लाह अंसारी और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन कुमार पांडे के अनुसार, सूर्य की रोशनी विटामिन डी के निर्माण में मदद करती है।

विटामिन डी हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। हालांकि, इसका लाभ धूप में बिताए गए समय, मौसम और त्वचा सहित कई कारकों पर निर्भर करता है।

भगवान विष्णु से जुड़ी है आंवला पूजा की मान्यता

सहजौली गांव के आचार्य पंडित मनोज कुमार चौबे बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है।

इसी कारण कार्तिक मास में आंवले के वृक्ष की पूजा और उसमें जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर वृक्ष की पूजा करते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं। इस दौरान परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है।

आंवला नवमी पर पूजा और दान का विशेष विधान

कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी या अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा, दान-पुण्य और वृक्ष के नीचे भोजन करने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का अक्षय फल मिलता है। कार्तिक मास में आंवले की पूजा को आरोग्य, सकारात्मकता और आध्यात्मिक शांति से भी जोड़कर देखा जाता है।

पूजा-पाठ के साथ शारीरिक सक्रियता पर भी जोर

कार्तिक स्नान की परंपरा में सुबह जल्दी उठना, स्नान करना, टहलना और आंवले के वृक्ष की परिक्रमा जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।

नियमित सैर शरीर को सक्रिय रखने में मदद करती है। वहीं, सुबह की धूप विटामिन डी के निर्माण में सहायक हो सकती है।

हालांकि, केवल कार्तिक स्नान या धूप में रहने से सभी स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित नहीं होते। मौसम और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए दिनचर्या अपनाना जरूरी है। धार्मिक आस्था और स्वस्थ जीवनशैली का यह मेल कार्तिक मास की परंपराओं को विशेष बनाता है।