पिपलेश्वर महादेव: मथुरा के चार रक्षक शिव स्वरूपों में से एक, क्या है मंदिर का रहस्य और महिमा?
मथुरा में यमुना किनारे स्थित पिपलेश्वर महादेव मंदिर शहर के चार प्राचीन रक्षक शिव मंदिरों में से एक है। यह ...और पढ़ें

मथुरा के पिपलेश्वर महादेव मंदिर का रहस्य (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
मथुरा के चार प्राचीन रक्षक शिव मंदिरों में से एक।
यमुना किनारे स्थित, प्रह्लाद ऋषि और पिपलाद मुनि से जुड़ा।
सावन में विशेष भीड़, शनि दोष निवारण हेतु पूजित।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मथुरा शहर में यमुना नदी के किनारे विश्राम घाट के पास स्थित है भगवान शिव का एक अत्यंत प्राचीन और सम्मानित मंदिर। जिसे पिपलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।
यह मंदिर उन चार प्राचीन रक्षक या 'क्षेत्रपाल' शिव मंदिरों में से एक है जो परंपरा के अनुसार मथुरा के पवित्र शहर की चारों दिशाओं से रक्षा करते हैं। इनमें भूतेश्वर, रंगेश्वर, गोकर्णेश्वर और चौथा पिपलेश्वर महादेव मंदिर शामिल हैं।
इस मंदिर में एक पवित्र शिवलिंग स्थापित है और यहां शिव जी की पूजा पवित्र शहर के शक्तिशाली रक्षक और ब्रज की परंपरा के अनुसार कृष्ण के महान भक्त के रूप में की जाती है। आइए आपको बताते हैं आखिर क्यों खास है यह मंदिर और इसका रहस्य क्या है?
मथुरा के चार रक्षक महादेवों में एक
मथुरापुरी जो कि सप्तपुरियों में से एक मानी जाती है और उस मथुरा पुरी के चार रक्षक हैं। यहां के चार क्षेत्रपाल हैं जिनको भगवान शिव के चार अलग-अलग रूपों में चारों दिशाओं में स्थित हैं।
यहां पूर्व दिशा में पिपलेश्वर महादेव मौजूद हैं। पिपलेश्वर महादेव बिल्कुल यमुना के तट पर स्थित हैं। यमुना जी के पूर्णतीत विश्राम घाट के निकट प्रयाग घाट के समीप पिपलेश्वर महादेव विराजमान है और उनकी महिमा भी बहुत निराली है। इस मंदिर को ब्रज के प्रमुख महादेवों में से एक माना जाता है।
प्रह्लाद ऋषि से जुड़ी है पिपलेश्वर महादेव की मान्यता
इस मंदिर के लिए मान्यता है कि प्रह्लाद ऋषि ने भी यहां तप किया था। ये वही भूमि है और यहां कीलमठ देव ने सभी ऋषि महर्षियों की पवित्र भूमि है। यहां 24 कोटि प्रह्लाद ऋषि ने जो तप किया इसलिए इनका नाम कपलेश्वर महादेव पड़ा।
पिपलेश्वर महादेव के लिए एक मान्यता यह भी है कि जब मुगलों का साम्राज्य था तब इस मंदिर पर आक्रमण किया गया था, लेकिन मंदिर को क्षति नहीं पहुंचा पाए। मुगलों ने मथुरा को 17 बार लूटा, लेकिन मंदिर की क्षवि को क्षति नहीं पहुंचा सके।
शिवलिंग पर आज भी है निशान
मुगलों के समय औरंगजेब ने एक बार इस शिवलिंग को खंडित करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ भी न बिगाड़ पाया। शिवलिंग के लिए मान्यता यह भी है कि इसमें अभी भी निशान मौजूद है।
सावन में मंदिर में श्रद्धालुओं की लगती है भीड़
मथुरा के चार प्रमुख महादेवों में एक हैं पिपलेश्वर महादेव जी और सावन में इस मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। चारों रक्षकों में से प्रमुख माना जाता है इस मंदिर को।
ऐसा कहा जाता है कि शनि की महादशा और साढ़े साती के प्रभाव की कम करने के लिए इस मंदिर में जल चढ़ाना काफी होता है। इस मंदिर में महादेव के साथ माता पार्वती जी की प्रतिमा भी मौजूद है जिनकी पूजा से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
पिपलाद मुनि से जुड़ी कथा
इस मंदिर की कथा भागवत पुराण में भी मिलती है और श्रीमद् भागवत में पिपलाद ऋषि का जो प्रसंग आता है जिन्होंने पीपल के पेड़ के नीचे तपस्या की थी वो इसी मंदिर से जुड़ा हुआ है। पिपलाद मुनि ने इस मंदिर की स्थापना की जहां आज भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और शिवलिंग के दर्शन करते हैं।
वास्तव में मथुरा का यह मंदिर बहुत खास है और सदियों से मथुरा के रक्षकों में से एक होने का स्थान रखता है।
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